29 या 30 अप्रैल कब है नरसिंह जयंती? जानें सही तिथि, पूजा विधि और पूजा का शुभ मुहूर्त

नरसिंह जयंती हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है, जो भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की स्मृति में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने आधे सिंह और आधे मानव रूप में अवतार लेकर अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी और दैत्य हिरण्यकशिपु का वध किया था.

Narasimha Jayanti 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

नरसिंह जयंती हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है, जो भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की स्मृति में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने आधे सिंह और आधे मानव रूप में अवतार लेकर अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी और दैत्य हिरण्यकशिपु का वध किया था. यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, कई लोगों को कन्फ्यूजन है कि इस साल नरसिंह जयंती कब है, तो चलिए हम आपको बताते हैं.

नरसिंह जयंती 2026 तिथि और समय
चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 29 अप्रैल 2026 को रात 07.51 बजे होगा और इसका समापन 30 अप्रैल 2026 को रात 09.12 बजे होगा. हालांकि पूजा और व्रत का महत्व मुख्य रूप से मध्याह्न काल में माना जाता है.

नरसिंह जयंती 2026 शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा का सबसे शुभ समय मध्याह्न संकल्प और पूजा मुहूर्त माना जाता है, जो सुबह 10.59 बजे से दोपहर 01.38 बजे तक रहेगा. इसके अलावा सायंकाल पूजा का समय शाम 04.17 बजे से 06.56 बजे तक शुभ माना गया है. भक्त इस अवधि में पूजा और व्रत का पालन करते हैं.

नरसिंह जयंती 2026 महत्व
नरसिंह जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है. यह दिन यह संदेश देता है कि भगवान अपने सच्चे भक्तों की हमेशा रक्षा करते हैं. प्रह्लाद की भक्ति और भगवान नरसिंह का प्रकट होना इस बात का प्रतीक है कि सच्ची आस्था कभी व्यर्थ नहीं जाती. इस दिन व्रत रखने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलने की मान्यता है.

नरसिंह जयंती 2026 व्रत और पूजा विधि
इस दिन भक्त अपनी क्षमता अनुसार निर्जला, फलाहार या एकभुक्त व्रत रखते हैं. सुबह स्नान करके पीले वस्त्र पहनकर पूजा की जाती है. भगवान नरसिंह की प्रतिमा स्थापित कर पंचामृत से अभिषेक किया जाता है. फूल, तुलसी पत्र अर्पित किए जाते हैं और घी का दीपक जलाया जाता है. इसके बाद नैवेद्य चढ़ाकर आरती की जाती है और क्षमा प्रार्थना की जाती है. दिनभर मन को शांत रखकर भगवान का ध्यान करना शुभ माना जाता है.

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!

RECOMMENDED