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Navratri Special: इस शक्तिपीठ में पुजारी रोज अपना सिर काटकर मां को करते थे समर्पित, चमत्कारों के लिए विख्यात है भगदेई देवीमठ 

Bhagdei Shaktipeeth: इस समय शारदीय नवरात्रि के कारण पूरे देश में भक्ति का माहौल है. आज हम आपको मध्य प्रदेश के रायसेन जिले स्थित भगदेई शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पुजारी रोज अपना सिर काटकर मां को समर्पित करते थे. यह शक्तिपीठ चमत्कारों के लिए विख्यात है.  

Bhagdei Shaktipeeth 
राजेश रजक
  • रायसेन,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. भक्त इन पवित्र दिनों में साधना करते हैं. नवरात्रि में तांत्रिक शक्ति पीठों पर साधना का अलग महत्व होता है. आज हम आपको एक ऐसे शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पुजारी रोज अपना सिर काटकर मां को समर्पित करते थे. यह शक्तिपीठ चमत्कारों के लिए विख्यात है. जी हां, हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की बरेली तहसील के पास जामगढ़-भगदेई गांव में स्थित भगदेई शक्तिपीठ की. यह पावन स्थल विंध्याचल पर्वतमाला की तलहटी में बसा हुआ है और इसे माता कामाख्या का एक प्रमुख उप-शक्तिपीठ माना जाता है. यहां साधना का विशेष महत्व माना जाता है. कहा जाता है कि द्वापर युग में स्यमंतक मणि की खोज के दौरान भगवान श्रीकृष्ण यहां आए थे. इस वजह से स्थानीय लोग उन्हें अपना जामाता मानते हैं. 

देवी ने पुजारी से कही थी यह बात
रायसेन जिला मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर बरेली तहसील में स्थित भगदेई गांव में यह प्राचीन कामाख्या उप-शक्तिपीठ मंदिर मौजूद है. ऐसी मान्यता है कि यहां के पुजारी रोज पूजा-पाठ के बाद अपना सिर काटकर मां को अर्पित करते थे और देवी की कृपा से पुनः जीवित हो जाते थे. स्थानीय जानकार पंडित कमल यागबल्कि के अनुसार, एक समय देवी ने स्वयं पुजारी को यह प्रथा बंद करने का आदेश दिया था, क्योंकि कलयुग का आरंभ हो चुका था.

और फिर जीवित नहीं हो पाए पुजारी
माता रानी ने पुजारी से कहा कि अब अपना सिर काटकर मुझे भेंट न करें, मेरी कृपा पात्र है और मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है. कहते हैं कि देवी के मना करने के बावजूद एक दिन पुजारी ने अपनी पुरानी परंपरा निभाते हुए फिर से अपना सिर अर्पित कर दिया, लेकिन इस बार वह दोबारा जीवित नहीं हो पाया. इस घटना के बाद यह परंपरा हमेशा के लिए समाप्त हो गई. आज भी यह कथा लोगों के बीच श्रद्धा और रहस्य का विषय बनी हुई है.

तांत्रिक साधना और विशेष मान्यताएं
यह स्थान आज भी तांत्रिक साधना और शोध के लिए जाना जाता है. यहां कामाख्या देवी की प्रसव अवस्था की प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जो इस मंदिर को और भी विशेष बनाती है. नवरात्रि के दौरान यहां तांत्रिक क्रियाएं और साधनाएं की जाती हैं, और साधक अपनी सिद्धियां प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं.

शिव-शक्ति का पवित्र संगम
जामगढ़-भगदेई क्षेत्र को शिव और शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है. कई धार्मिक ग्रंथों में सती प्रसंग से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख इस स्थान से जुड़ा हुआ बताया गया है. यहां सदियों पुराना शिव मंदिर और जामवंत गुफा भी स्थित है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं.

भगदेई नाम का संबंध भगदेवी से 
कई विद्वानों और इतिहासकारों के अनुसार, भगदेई नाम का संबंध भगदेवी से है, जो समय के साथ अपभ्रंश होकर वर्तमान नाम में बदल गया. भगदेई का अर्थ भग यानी योनि और देह का अपभ्रंश देई है. इसी तरह जाम्बगढ़ का नाम भी बदलकर जामगढ़ हो गया. यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही शिव और शक्ति की उपासना का केंद्र रहा है.

 

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