संगम नगरी प्रयागराज में ऐतिहासिक दधिकांदो मेले की रौनक देखने लायक रही. रंग-बिरंगी रोशनी, सजी हुई दुकानें, चारों तरफ लोगों की भीड़ और देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया. मेले में लाखों की संख्या में लोग पहुंचे और परिवार के साथ जमकर आनंद लिया. मेले में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की झांकी लोगों के आकर्षण का खास केंद्र रही. भोलेनाथ के सिर से निकलती अग्नि का दृश्य देखकर लोग रोमांचित हो उठे. कई लोग इस खास नजारे को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करते नजर आए. वहीं भगवान श्रीकृष्ण और राधा की मनमोहक झांकी ने भी लोगों का ध्यान खींचा. दोनों के नृत्य पर मेले में मौजूद लोग झूम उठे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गूंज उठा.
मां काली के रूप ने चौंकाया
मेले में मां काली का स्वरूप और उनका नृत्य भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा. अचानक सामने आए इस रूप ने वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया. देवी-देवताओं से जुड़े ऐसे कई आकर्षक रूप और झांकियां मेले की रौनक बढ़ाती नजर आईं. प्रयागराज के दधिकांदो मेलों में कृष्ण लीलाओं के साथ अलग-अलग धार्मिक झांकियां पेश करने की परंपरा पुरानी रही है. सुलेम सराय में आयोजित यह ऐतिहासिक मेला करीब 10 किलोमीटर के दायरे में सजा. दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ यहां पहुंचे. रंग-बिरंगी दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की, वहीं बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई मेले की रौनक में डूबा नजर आया. मेला क्षेत्र में खाने-पीने से लेकर अलग-अलग तरह की दुकानें भी लोगों को अपनी ओर खींचती रहीं. झूले और दूसरी मनोरंजन की चीजों का भी लोगों ने खूब आनंद लिया.
डीजे पर थिरके युवा, परिवारों ने की मस्ती
मेले में सिर्फ धार्मिक झांकियां ही आकर्षण का केंद्र नहीं रहीं, बल्कि मनोरंजन का भी पूरा इंतजाम दिखा. डीजे की धुन पर युवाओं ने जमकर डांस किया. परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने भी मेले में घूमने, खाने-पीने और खरीदारी का खूब लुत्फ उठाया. पूरे मेला क्षेत्र में देर रात तक चहल-पहल बनी रही. रंगीन रोशनी और लोगों की भीड़ ने माहौल को और खास बना दिया.
सुरक्षा के भी किए गए पुख्ता इंतजाम
मेले में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर भी खास ध्यान दिया गया. बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी. दधिकांदो मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस, पीएसी और अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती किए जाने की परंपरा भी रही है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, सुलेम सराय का यह दधिकांदो मेला वर्षों से आयोजित होता आ रहा है और हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. आस्था, झांकियों, खरीदारी और मनोरंजन से सजा यह मेला देर रात तक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा.
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