शिरडी साईबाबा मंदिर में एक बार फिर श्रद्धा और आस्था की अनूठी मिसाल देखने को मिली है. दिल्ली के एक भक्त ने अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद साईबाबा मंदिर को करीब 15 लाख रुपये मूल्य का असली हीरों से जड़ा मोरपंख आकार का सोने का ब्रोच भेंट किया है. भक्त ने अपनी पहचान सार्वजनिक न करने की इच्छा जताई है, जिसे मंदिर प्रशासन ने सम्मानपूर्वक स्वीकार किया है. हीरों जड़े इस विशेष ब्रोच के अलावा श्रद्धालु ने मंदिर में करीब 9 लाख रुपये का नकद चढ़ावा भी अर्पित किया. बताया जा रहा है कि भक्त लंबे समय से साईबाबा में गहरी आस्था रखते हैं और उनकी मुराद पूरी होने के बाद उन्होंने यह विशेष भेंट साई दरबार में समर्पित की.
साईबाबा के वस्त्रों की शोभा बढ़ाएगा ब्रोच
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस बेशकीमती ब्रोच का उपयोग साईबाबा की प्रतिमा पर ओढ़ाई जाने वाली चादर के ऊपर पहनाए जाने वाले दुपट्टे को सजाने के लिए किया जाएगा. मोरपंख के आकार में तैयार किया गया यह ब्रोच न केवल कलात्मक रूप से आकर्षक है, बल्कि इसमें जड़े असली हीरे इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं. शिरडी साईबाबा मंदिर में बीते कुछ समय से सोना, चांदी और बहुमूल्य रत्नों के चढ़ावे में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है. देश-विदेश से आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार बाबा को कीमती उपहार अर्पित कर रहे हैं.
दो दिन पहले चढ़ाया गया था एक करोड़ का स्वर्ण मुकुट
गौरतलब है कि हाल ही में लखनऊ के श्रद्धालु गोपाल गोयल ने भी साईबाबा मंदिर को करीब एक करोड़ रुपये मूल्य का सोने का मुकुट भेंट किया था. लगातार मिल रहे ऐसे चढ़ावे साईबाबा के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा को दर्शाते हैं.
साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के सीईओ गोरक्ष गाडिलकर ने बताया कि बाबा के भक्त उन्हें अपने परिवार के सबसे करीबी सदस्य और गुरु के रूप में मानते हैं. श्रद्धालु गुरु दक्षिणा और सेवा भाव से बाबा के चरणों में अपनी भेंट समर्पित करते हैं. उन्होंने बताया कि दिल्ली के श्रद्धालु द्वारा अर्पित किया गया लगभग 80 ग्राम का हीरों जड़ा ब्रोच करीब 15 लाख रुपये मूल्य का है. भक्त ने विशेष रूप से अपना नाम सार्वजनिक न करने का अनुरोध किया है.
शिरडी साईबाबा मंदिर देश के सबसे बड़े आस्था केंद्रों में शामिल है. यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार भेंट अर्पित करते हैं. यह नया चढ़ावा भी भक्तों की गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया है.
(रिपोर्ट- नितिन मिराणे)
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