Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री का व्रत आज, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त, इस दिन क्या करें और क्या नहीं, यहां जानें सबकुछ 

Vat Savitri 2026: हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इस बार वट सावित्री व्रत 16 मई को है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं. आइए जानते हैं वट सावित्री पूजा के लिए क्या शुभ मुहूर्त है और इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

Vat Savitri Vrat
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:36 AM IST

Vat Savitri Vrat 2026 Shubh Muhurat: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है. हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इस बार वट सावित्री व्रत 16 मई को है. इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं. सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार कर वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं.

इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है. सावित्री ने इसी वृक्ष के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे. ऐसे में इसे अक्षय वृक्ष माना जाता है जो दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक है. इस साल वट सावित्री व्रत के दिन शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इसके अलावा गजकेसरी और बुधादित्य जैसे राजयोग भी बन रहे हैं, जो इस दिन के धार्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं.

वट सावित्री व्रत शुभ मुहूर्त
इस साल ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह से शुरू हो रही है. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार वट सावित्री व्रत इसी दिन रखा जाएगा. अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई 2026 की सुबह 05 बजकर 11 मिनट से होगी और तिथि का समापन 17 मई 2026 की रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा. पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त शनिवार सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा.

1. अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई, सुबह 05:11 बजे से
2. अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई, रात 01:30 बजे तक
3. पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 07:12 से 08:24 बजे तक
4. अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:45 बजे तक

वट सावित्री व्रत पूजन सामग्री
सावित्री और सत्यवान की मूर्ति या तस्वीर, कच्चा सूत (सफेद या पीला), वट वृक्ष की टहनी, बांस का पंखा, रोली (कुमकुम) और अक्षत (बिना टूटे हुए चावल), धूप, अगरबत्ती, मिट्टी का दीपक, देसी घी, रुई की बत्ती, कलश (मिट्टी या तांबे का), मौली (कलावा), गंगाजल, नैवेद्य और फल (भोग), भीगे हुए काले चने, मौसम के फल जैसे आम, लीची, खरबूजा और केला, पकवान घर में बने पुए (गुलगुले) या सुहाली और बताशे या मिठाई आदि.

वट सावित्री व्रत के दिन क्या करें
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. 
2. इस दिन लाल, पीले या हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.
3. सुहागिन महिलाएं 16 शृंगार करें और माथे पर सिंदूर जरूर लगाएं.
4. बरगद के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं. 
5. वट वृक्ष की 7, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत या मौली लपेटें.
6. सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा जरूर सुनें या पढ़ें. मान्यता है कि कथा के बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता.
7. पूजा के बाद अपनी सास और घर के बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट करें.

वट सावित्री व्रत के दिन क्या नहीं करें
1.
पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें.
2. व्रत रखने वाली महिलाओं को दिन में सोने से बचना चाहिए. 
3. इस दिन पति या घर के किसी भी सदस्य से बहस न करें. 
4. मन को शांत रखें और सकारात्मक विचार रखें.
5. यदि आप फलाहारी व्रत रख रही हैं तो लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन का सेवन  न करें.

 

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