Advertisement

Temple Bell Significance: मंदिर में घंटी क्यों बजाई जाती? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व... चमत्कारी हैं लाभ!

मंदिर की घंटी की आवाज को 'ॐ' के समान पवित्र माना जाता है. पूजा, आरती और यज्ञ के दौरान घंटी बजाने से वातावरण भक्तिमय हो जाता है. घंटी की ध्वनि मन को शांत करती है और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है. मान्यता है कि इससे आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.

Why do Hindu temples have bells
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:38 AM IST

मंदिर के अंदर जाते समय सबसे घंटी बजाते हैं, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हिंदू धर्म में इसे बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि मंदिर की घंटी की ध्वनि से मन शांत होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की आराधना कर पाता है. धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर मंदिर की घंटी बजाने का महत्व क्या है? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं...

क्या है मंदिर की घंटी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में मंदिर की घंटी को केवल पूजा का साधन नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक माना जाता है. संस्कृत में इसे 'घंटा' कहा जाता है. मान्यता है कि घंटी का ऊपरी गोल भाग अनंत का प्रतीक होता है, उसका अंदर का भाग देवी सरस्वती का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि उसका हैंडल दिव्य शक्ति और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. स्कंद पुराण के अनुसार मंदिर की घंटी की ध्वनि से पापों का नाश होता है और भक्त का मन ईश्वर की भक्ति में लग जाता है.

घंटी बजाने से मिलते हैं ये आध्यात्मिक लाभ
मंदिर की घंटी की आवाज को 'ॐ' के समान पवित्र माना जाता है. पूजा, आरती और यज्ञ के दौरान घंटी बजाने से वातावरण भक्तिमय हो जाता है.
घंटी की ध्वनि मन को शांत करती है और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है. मान्यता है कि इससे आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
धार्मिक विश्वास के अनुसार घंटी की कंपन शरीर के सातों चक्रों को संतुलित करने में सहायक होती है.
यह भक्त और भगवान के बीच आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक भी मानी जाती है.

क्या कहते हैं वैज्ञानिक कारण
कुछ वैज्ञानिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर की घंटी से निकलने वाली ध्वनि तरंगें दूर तक फैलती हैं. माना जाता है कि ये तरंगें वातावरण को शुद्ध करने में मदद करती हैं और मन व मस्तिष्क को शांत रखती हैं. घंटी की मधुर आवाज से तनाव कम होता है और व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक संतुलित महसूस करता है.

किस धातु से बनती है मंदिर की घंटी
पारंपरिक रूप से मंदिर की घंटियां पांच धातुओं तांबा, सोना, चांदी, लोहा और जस्ता से बनाई जाती हैं. इन धातुओं का मिश्रण ऐसी ध्वनि पैदा करता है जो लंबे समय तक गूंजती है और वातावरण में सकारात्मक कंपन उत्पन्न करती है.

मंदिर में होती हैं तीन तरह की घंटियां
मंदिरों में मुख्य रूप से तीन प्रकार की घंटियां देखने को मिलती हैं.
हैंगिंग बेल: मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगी होती है और दर्शन से पहले बजाई जाती है.
गरुड़ बेल: छोटी घंटी होती है, जिसका उपयोग पूजा, यज्ञ और आरती के दौरान किया जाता है.
हैंड बेल: इसे पुजारी पूजा और आरती के समय हाथ में लेकर बजाते हैं.

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement