आजकल लोग की लाइफस्टाइल और हेल्थ के प्रति काफी सजग है, इसलिए वह कोशिश करते हैं कि ऐसी चीज़ों को सेवन करें जिससे उनकी हेल्थ अच्छी बनी रहे. कई राज्यों में गंदे पानी की समस्या होती है. वहां का पानी पीने लायक नहीं होता है. ऐसे में उस अनफिलटर्ड पानी को पीकर लोगों को बीमारियां हो सकती है. ऐसे में लोग पानी को पीने लायक बनाने के लिए आरओ (RO) का इस्तेमाल करते है. फिर उस पानी को पीने के लिए स्टोर करते हैं. यह तरीका केवल कुछ महीने से नहीं बल्कि कई सालों से लोग कर रहें हैं. द टेलिग्राफ में इस रिसर्च को लेकर खबर छापी गई है.
हाल ही में एक रिसर्च हुई, जिसमें उन घरों से पानी का सैंपल लिया गया जहां आरओ के पानी का इस्तेमाल होता है. हैरानी की बात यह है कि लोग जिस पानी को पीने योग्य मान रहे थे. उसमें 'ई-कोलाई' बैक्टीरिया पाया गया. जिन घरों से पानी का सैंपल लिया गया तो रिसर्च के नतीजे यही रहे कि हर 3 में से 1 सैंपल में यह बैक्टीरिया मौजूद था. इन रिजल्ट ने फिल्टर किए गए पानी के ऊपर सवाल खड़े कर दिए. सवाल भी ऐसे कि क्या हमारे पानी को स्टोर करने के तरीके में गलती है या फिर किसी और जगह हमसे गलती हो रही है.
किसने की रिसर्च?
इस रिसर्च को आईआईटी (मद्रास) के कुछ वैज्ञानिकों ने कुछ रिसर्चरों के साथ मिलकर किया. इस रिसर्च में 262 पानी से सैंपल लिए गए थे. जिसमें से 81 सैंपल में यह बैक्टीरिया पाया गया. यह सारे सैंपल चेन्नई से लिए गए थे. स्टडी का मानना है कि पानी के अंदर बैक्टीरिया के होने का मुख्य कारण फिलटर्ड पानी को स्टोर करने के तरीके में कमी के कारण हो सकता है. इस स्टडी को 'जर्नल ऑफ एक्सपोरजर साइंस एंड एयवारयमेंटल एपिडेमियोलॉजी' में पब्लिश किया गया है.
स्टडी के मुख्य नतीजे क्या हैं?
स्टडी मुख्य रूप से यही कहती है कि पानी में कंटेमिनेशन फिलटर की प्रक्रिया के दौरान नहीं, बल्कि जब एक जगह के दूसरी जगह ट्रांस्फर करने के दौरान होती है. द टेलिग्राफ से बात करते हुए रिसर्च को लीड करने वाले प्रोफेसर ने कहा, 'आरओ अपना काम अच्छी तरह कर रह हैं, लेकिन केवल फिलटर की प्रक्रिया से सुरक्षित पानी की गारंटी नहीं मिल सकती, जब तक उस पानी को सही से हैंडल न किया जाए '. पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मौजूद होने की वजह है कि साफ फिल्टर हुए पानी को गंदे कंटेनर में स्टोर करना. या फिर जब यह गंदे नल से बाहर आता है.
क्या है ई-कोलाई बैक्टीरिया?
ई-कोलाई एक तरह का माइक्रोब है जो आमतौर पर इंसानों और जानवरों की आंतों में पाया जाता है. इस बैक्टीरिया के कारण दायरिया, उल्टी, पेट दर्द और यहां तक किडनी में दिक्कत हो सकती है.