दिलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेला जा रहा है. ईस्ट जोन की टीम ने 708 रनों का स्कोर खड़ा किया है. जिसके जवाब में साउथ जोन की पूरी टीम पहली पारी में ऑलआउट हो गई. साउथ जोन की टीम ने 336 रन बनाए. तीसरे दिन के आखिरी सेशन के दौरान एक अलग नजारा देखने को मिला. मैदान पर उस वक्त तनाव देखने को मिला, जब मैदानी अंपायर वीरेंद्र शर्मा ने मोहम्मद शमी को चेतावनी दी.
क्या था मामला?
साउथ जोन की पहली पारी के 60वें ओवर में गेंद ईस्ट जोन के गेंदबाज मोहम्मद शमी के हाथों में थी. इस दौरान ऑन-फील्ड अंपायर वीरेंद्र शर्मा ने शमी से गेंद मांगी. जिसके बाद दोनों पक्षों में काफी देर तक बातचीत हुई.
दरअसल मोहम्मद शमी गेंद की स्थिति से खुश नहीं थे. वो इसे बदलना चाहते थे. लेकिन अंपायर गेंद बदलने नहीं चाहते थे और उन्होंने फिल्डिंग टीम यानी ईस्ट जोन की टीम को गेंद चमकाने के लिए पसीने के बहुत ज्यादा इस्तेमाल को लेकर हिदायत भी दी. एमसीसी के नियमों के मुताबिक गेंद की हालत से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती.
सूर्यवंशी भी अंपायर के पास पहुंचे-
जब मोहम्मद शमी और अंपायर के बीच गेंद को लेकर बातचीत हो रही थी. उस दौरान गेंदबाज मुकेश कुमार और टीम के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी भी पहुंच गए और स्थिति को समझने की कोशिश की. इन खिलाड़ियों ने चेतावनी देने की वजह जानी.
क्या है नियम?
क्रिकेट के नियम 41.3 के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी गेंद की स्थिति को जानबूझकर नहीं बदल सकता. लेकिन उसमें ये भी जिक्र है कि खिलाड़ी अपने पोशाक से गेंद को रगड़कर चमका सकते हैं. लेकिन इस नियम में इसका जिक्र नहीं है कि कितना पसीना लगाया जा सकता है. इसका मतलब है कि नियम के मुताबिक ज्यादा पसीना लगाना नियम के खिलाफ नहीं है.
अंपायर को ये अधिकार है कि वो कभी भी गेंद की जांच कर सकते हैं और अगर उनको ये शक होता है कि कोई खिलाड़ी नियमों का उल्लंघन कर रहा है तो वो एक्शन ले सकते हैं.
ईशान किशन ने खेली विस्फोटक पारी-
फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन ने 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया. ईस्ट जोन की तरफ से कप्तान ईशान किशन ने धमाकेदार 270 रनों की पारी खेली. इस दौरान उन्होंने 7 छक्के और 30 चौके लगाए. इसके साथ ही कुमार कुशाग्र ने 101 रनों की पारी खेली. जबकि साउथ जोन की तरफ से कप्तान तिलक वर्मा ने 99 रनों की पारी खेली.
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