अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने AI के जरिए साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह AI टूल 'जेमिनी' का इस्तेमाल कर डीपफेक वीडियो और बायोमेट्रिक वैरिफिकेशन के जरिए बिना OTP के ठगी कर रहा था. पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. सभी का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है. इस नए तरीके की ठगी देखकर साइबर क्राइम टीम भी हैरान है.
शिकायत के बाद खुला मामला, व्यापारी को नहीं मिला OTP
यह मामला एक आयात-निर्यात व्यापारी की शिकायत के बाद सामने आया. साइबर क्राइम ब्रांच की DCP लवीना सिन्हा के अनुसार, व्यापारी ने बताया कि उनके सभी लेन-देन OTP के जरिए होते थे, लेकिन दो दिनों तक OTP नहीं मिला. शक होने पर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई. जांच में सामने आया कि उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर को बिना OTP के ही बदल दिया गया था.
बायोमेट्रिक बदलकर खोला बैंक खाता, लिया लोन
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने न सिर्फ मोबाइल नंबर बदला, बल्कि बायोमेट्रिक डिटेल्स में भी छेड़छाड़ की. उनके नाम पर नया बैंक खाता खोला गया और 25 हजार रुपए का लोन भी लिया गया. साथ ही डिजिलॉकर अकाउंट को एक्सेस कर दस्तावेजों तक पहुंच बनाई गई.
आधार डेटा और फोटो से बनाया AI वीडियो
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों के पास पीड़ित का आधार नंबर, मोबाइल डेटा और फोटो पहले से मौजूद थे. इन्हीं के आधार पर AI से डीपफेक वीडियो तैयार किया गया और उसी के जरिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पूरा किया गया. इस पूरे फ्रॉड में एक CSC सेंटर संचालक कनुभाई परमार की अहम भूमिका रही, जिसने अपने आधिकारिक किट का दुरुपयोग किया.
ऐसे बदलते थे नंबर और करते थे ठगी
आरोपियों ने आधार सिस्टम में मोबाइल नंबर बदलकर नया नंबर अपने कब्जे में ले लिया. इसके बाद OTP उसी नंबर पर आने लगा. फिर e-KYC के जरिए तीन बैंकों में खाता खोलने की कोशिश की गई, जिसमें जियो पेमेंट बैंक में खाता खोलकर लोन लिया गया. AI जनरेटेड वीडियो के जरिए बायोमेट्रिक वैरिफिकेशन कर पूरी ठगी को अंजाम दिया गया.