प्रयागराज संगम तट पर लगे माघ मेले में लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखने की कोशिश में मेला प्रशासन पूरी कोशिश में लगा हुआ है. माघ मेला में श्रद्धालुओं के लिए रहने से लेकर खाने-पीने के साथ कई इंतजाम किए गए है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं को नदी में स्वच्छ जल से स्नान कराना है. उत्तर प्रदेश सरकार ने इस का ध्यान रखा है.
संगम में आने वाली नदियों का जल शुद्ध रहे और भक्त आस्था की पवित्र डुबकी लगा सकें. इसके लिए मिनी अस्थाई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का इंतजाम किया गया है. जिसमें नदियों में गिरने वाले पानी को वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए साफ कर संगम की नदियों में छोड़ा जा रहा है. जिसके लिए प्रयागराज में एक मिनी अस्थाई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को बनाया गया है.
कैसे होता है पानी साफ
ये प्लांट नालों के गंदे पानी को साफ और शुद्ध करके नदियों में छोड़ता है. जिससे श्रद्धालुओं के लिए स्नान करने का पानी पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है. ये प्लांट स्लोरी साइड (Salori Site) पर लगाया गया है. प्लांट की खासियत तकनीक जियो ट्यूब (Geo Tube) और ओजोन तकनीक का उपयोग कर नालों के गंदे पानी को बैक्टीरिया रहित के साथ गंधरहित के अलावा स्नान योग्य साफ पानी में बदला है. ऑक्सीजन वृद्धि शुद्धिकरण प्रक्रिया से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है, जो इसे स्वास्थ्य के लिए और भी उपयोगी बनाती है.
कितनी है प्लांट की क्षमता
प्लांट की क्षमता और संचालन रोजाना 29 MLD (मिलियन लीटर प्रति दिन), यानी प्रतिदिन लगभग 2.9 करोड़ लीटर पानी साफ करना है. इस प्लांट में 70 कर्मचारी 24x7 काम कर रहे हैं. ये प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश जल निगम (यू.पी. जल निगम) और अर्बन द्वारा INGEO एवं ORAIPL (जॉइंट वेंचर) के सहयोग से चल रहा है.
पर्यावरण का रखा जा रहा ख्याल
ये व्यवस्था न केवल माघ मेला को सफल बना रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी भूमिका निभा रहा है. कार्यकारी अधिकारी रजनीश मेहरा के मुताबिक "हम इस ट्रीटमेंट प्लांट में श्रद्धालुओं को स्वच्छ पानी मुहैया कराने का पूरा ख्याल रख रहे हैं. कैसे साफ पानी नदी में छोड़ा जाए, इस बात का ध्यान रखते हुए हर दिन करोड़ों लीटर गंदे पानी को साफ कर नदी में छोड़ रहे हैं."
- आनंद राज की रिपोर्ट