भारत सरकार ने स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के अपने प्रस्ताव को वापस ले लिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब सरकार डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में लगातार मेहनत कर रही है. इस प्रस्ताव को समीक्षा के दौरान ही रोक दिया गया.
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने साल की शुरुआत में ही आईटी मंत्रालय से अनुरोध किया था कि वह स्मार्टफोन कंपनियों से बातचीत करे. कोशिश यह थी कि भारत में बिकने वाले सभी नए स्मार्टफोन में आधार ऐप पहले से इंस्टॉल होकर आए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच बनाई जा सके. साथ ही लोग सेवाओं का लाभ ले सकें. का उपयोग आसान बने.
आधार का बढ़ रहा इस्तेमाल
आधार एक 12 अंकों की डिजिटल पहचान है, जो बायोमेट्रिक डेटा जैसे फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन पर आधारित होती है. आज देश में 1.34 अरब से अधिक लोग बैंकिंग, मोबाइल सिम वेरिफिकेशन और एयरपोर्ट एंट्री जैसी कई सेवाओं के लिए इसका इस्तामेल कर रहे हैं. ऐसे में सरकार का मकसद था कि आधार से जुड़ी सेवाओं को और आसान बनाया जाए.
सवालों के जवाब पर पर्दा
आईटी मंत्रालय ने प्रस्ताव की समीक्षा के बाद इसे आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया. UIDAI ने भी इस प्रस्ताव के पास न हो पाने के पीछे के कारणों के बारे में कुछ नहीं कहा है. साथ ही मंत्रालय की ओर से भी कोई ऑफिशियल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
यूजर्स को हो सकता है रिस्क
स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर कई सवाल उठाए. उनका कहना था कि किसी भी सरकारी ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करना यूजर प्राइवेसी, डिवाइस सिक्योरिटी और सिस्टम कंपैटिबिलिटी के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है. साथ ही, इससे उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है.
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह का प्रस्ताव वापस लिया हो. पिछले दो वर्षों में यह छठा मौका है जब स्मार्टफोन में सरकारी ऐप्स को अनिवार्य करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार कंपनियों के विरोध के चलते योजना को रोकना पड़ा.