दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना हर किसी का सपना हो सकता है, लेकिन वहां तक पहुंचना आसान नहीं है. सिर्फ हिम्मत और ताकत के दम पर कोई भी व्यक्ति एवरेस्ट पर नहीं चढ़ सकता. इसके लिए कई जरूरी नियमों का पालन करना पड़ता है. पर्वतारोहियों को पहले सरकार से अनुमति लेनी होती है और अपनी फिटनेस भी साबित करनी पड़ती है.
बिना परमिट नहीं कर सकते चढ़ाई
जो लोग नेपाल की तरफ से एवरेस्ट पर चढ़ना चाहते हैं, उन्हें नेपाल सरकार से परमिट लेना होता है. वहीं तिब्बत की तरफ से चढ़ाई करने वालों को चीन की संबंधित संस्था से अनुमति लेनी पड़ती है. खास बात यह है कि कोई भी व्यक्ति खुद जाकर परमिट के लिए आवेदन नहीं कर सकता. इसके लिए सरकार से मान्यता प्राप्त पर्वतारोहण या ट्रैकिंग एजेंसी की मदद लेनी होती है. यही एजेंसियां गाइड, शेरपा, बीमा और दूसरे जरूरी इंतजाम करती हैं.
पहले पहाड़ चढ़ने का अनुभव जरूरी
नेपाल सरकार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियम सख्त कर दिए हैं. अब एवरेस्ट पर चढ़ने की अनुमति पाने के लिए पर्वतारोही के पास 7000 मीटर से ज्यादा ऊंचे किसी पहाड़ पर चढ़ने का अनुभव होना जरूरी है. इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति ऊंचाई पर आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना कर सके.
फिटनेस का प्रमाण देना पड़ता है
एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना बहुत जरूरी है. हर आवेदक को मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना होता है. डॉक्टर यह जांचते हैं कि व्यक्ति का दिल, फेफड़े और शरीर ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन और खराब मौसम का सामना कर सकते हैं या नहीं.
कितना खर्च आता है?
एवरेस्ट पर चढ़ना काफी महंगा माना जाता है. विदेशी पर्वतारोहियों को सिर्फ परमिट के लिए 15,000 डॉलर यानी करीब 12 से 13 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं. वहीं नेपाली नागरिकों के लिए यह शुल्क करीब 75,000 नेपाली रुपये है. यही वजह है कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना सिर्फ साहस का नहीं, बल्कि अच्छी तैयारी, अनुभव और बड़े खर्च का भी काम है.
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