ट्रायल में इंडिगो एयरलाइंस और अन्य सहयोगी एजेंसियों ने हिस्सा लिया. परीक्षण के दौरान विमान के लैंड होने से लेकर यात्रियों की प्रक्रिया पूरी करने और दोबारा उड़ान भरने तक की सभी गतिविधियों को वास्तविक परिस्थितियों की तरह संचालित किया गया. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि एयरपोर्ट की सभी व्यवस्थाएं, तकनीकी सिस्टम और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पूरी तरह तैयार हैं या नहीं. ट्रायल के दौरान एयरपोर्ट की कई प्रमुख सुविधाओं का परीक्षण किया गया. इसमें विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS), पैसेंजर बोर्डिंग ब्रिज, ग्राउंड पावर यूनिट, बैगेज हैंडलिंग सिस्टम और कार्गो संचालन शामिल रहे.
साथ ही विमान में कैटरिंग सेवा, ग्राउंड हैंडलिंग और ईंधन भरने जैसी प्रक्रियाओं को भी बारीकी से परखा गया. अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि यात्रियों और एयरलाइंस को भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
सुरक्षित उड़ानों के लिए तकनीकी सत्यापन
एयरपोर्ट प्रशासन ने इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और रिक्वायर्ड नेविगेशन परफॉर्मेंस (RNP) अप्रोच प्रक्रियाओं का भी दोबारा सत्यापन किया. यह प्रक्रिया खराब मौसम और कम दृश्यता की स्थिति में भी सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. अधिकारियों का कहना है कि इन सभी परीक्षणों के सफल रहने के बाद एयरपोर्ट संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है.
15 जून से शुरू हो सकती हैं नियमित उड़ानें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों के मुताबिक यह ट्रायल अंतिम तैयारियों का हिस्सा था. इसके बाद 15 जून 2026 से नियमित कमर्शियल उड़ान सेवाएं शुरू करने की योजना है. जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भविष्य में देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होने जा रहा है. पहले चरण में यहां एक रनवे और आधुनिक यात्री टर्मिनल तैयार किया गया है, जिसकी सालाना क्षमता करीब 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी.
आने वाले वर्षों में विस्तार के बाद यह क्षमता 7 करोड़ यात्रियों से अधिक पहुंचने का अनुमान है. ऐसे में यह एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़े एविएशन और आर्थिक केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है.
(रिपोर्ट- अरुण त्यागी)
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