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4 महीने के पक्षी ने भरी 13,560 किमी की बिना रुके उड़ान, 11 दिन तक नहीं किया आराम, बनाया रिकॉर्ड

gnttv.com
  • 09 मार्च 2026,
  • Updated 4:40 PM IST
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एक छोटी सी चिड़िया ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है. केवल चार महीने के एक पक्षी ने बिना रुके हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर नया रिकॉर्ड बना दिया. यह पक्षी अलास्का से ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया तक करीब 13,560 किलोमीटर की दूरी लगातार उड़ते हुए तय कर गया. इस पूरी यात्रा में उसे करीब 11 दिन लगे और इस दौरान उसने न तो कहीं रुककर आराम किया और न ही कुछ खाया-पिया. इस पक्षी को वैज्ञानिकों ने B6 नाम दिया था और इसकी यात्रा को अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने सैटेलाइट टैग की मदद से ट्रैक किया.

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यह पक्षी बार-टेल्ड गॉडविट प्रजाति का है, जिसे दुनिया में सबसे लंबी बिना रुके उड़ान भरने वाले पक्षियों में माना जाता है. यह पक्षी आमतौर पर अलास्का और साइबेरिया के आर्कटिक इलाकों में प्रजनन करता है और सर्दियों में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की ओर प्रवास करता है. सामान्य तौर पर यह पक्षी अलास्का से न्यूजीलैंड तक करीब 11,000 किलोमीटर की दूरी तय करता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह खुले प्रशांत महासागर के ऊपर से लगातार उड़ते हुए करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ता है.

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इतनी लंबी उड़ान के लिए पक्षियों को खास तैयारी करनी पड़ती है. उड़ान से पहले यह पक्षी खूब खाना खाते हैं और अपने शरीर में काफी मात्रा में फैट जमा कर लेते हैं. B6 ने भी अलास्का में उड़ान से पहले इतना खाना खाया कि उसके शरीर का लगभग आधा हिस्सा फैट बन गया. यही फैट उड़ान के दौरान ऊर्जा का काम करता है. वैज्ञानिकों के अनुसार लंबी उड़ान के दौरान ये पक्षी अपने शरीर में भी बदलाव कर लेते हैं. वे पेट और लिवर जैसे कुछ अंगों को अस्थायी रूप से छोटा कर लेते हैं, जिससे उनका वजन कम हो जाता है और एनर्जी बचती है.

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लंबी दूरी की इस यात्रा में रास्ता ढूंढना भी बड़ी चुनौती होती है. वैज्ञानिक बताते हैं कि ऐसे पक्षी पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का इस्तेमाल प्राकृतिक कंपास की तरह करते हैं. उनकी आंखों में मौजूद खास प्रोटीन चुंबकीय संकेतों को पहचानने में मदद करते हैं. इसके अलावा पक्षी सूरज, तारों और वातावरण के संकेतों के आधार पर भी दिशा तय करते हैं. 

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हैरानी की बात यह है कि कई पक्षी उड़ते समय भी आराम कर लेते हैं. वे यूनिहेमिस्फेरिक स्लीप नाम की प्रक्रिया अपनाते हैं, जिसमें दिमाग का एक हिस्सा सोता है और दूसरा हिस्सा उड़ान को नियंत्रित करता रहता है. वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसी लंबी यात्राएं केवल बार-टेल्ड गॉडविट ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रवासी पक्षी भी करते हैं. अमूर फाल्कन हर साल भारत से उड़ान भरकर अफ्रीका तक हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं.