Indonesia Bans Grok: पॉर्नोग्राफिक कंटेंट को लेकर इंडोनेशिया चिंतित, उठाया चैटबॉट को लेकर सख्त कदम.. बना ग्रोक को बैन करने वाला पहला देश

इंडोनेशिया का यह फैसला वैश्विक स्तर पर एआई, डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा पर बहस को और तेज कर सकता है.

Indonesia Bans Grok
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 11 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:05 AM IST

इंडोनेशिया ने एलन मस्क के एआई चैटबॉट ग्रोक पर बड़ा कदम उठाते हुए उसे अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया है. यह फैसला फर्जी और एआई-जनरेटेड अश्लील कंटेंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है. इसके साथ ही इंडोनेशिया ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है. 

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया की संचार और डिजिटल मामलों की मंत्री ने शनिवार को कहा कि बिना सहमति के बनाए गए सेक्शुअल डीपफेक, ह्यूमन राइट, डिगनिटी और डिजिटल स्पेस में नागरिकों की सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं, बच्चों और आम जनता को एआई तकनीक से बने फर्जी अश्लील कंटेंट से बचाने के लिए सरकार ने ग्रोक की पहुंच देश में अस्थायी रूप से रोक दी है.

पेड सब्सक्राइबर्स का फैसला नहीं आया काम
यह कदम ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही ग्रोक ने एक्स पर इमेज जनरेशन और एडिटिंग फीचर्स को केवल पेड सब्सक्राइबर्स तक सीमित कर दिया था. यह फैसला डीपफेक को लेकर बढ़ती आलोचना को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा गया.

क्या बोले एलन मस्क?
कई देशों ने ग्रोक को लेकर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है. आरोप है कि इस टूल से यूज़र्स ऑनलाइन तस्वीरों में कपड़े हटाने जैसे बदलाव कर पा रहे थे. एलन मस्क ने कहा है कि ग्रोक का इस्तेमाल कर कोई भी व्यक्ति अगर गैरकानूनी कंटेंट बनाता है, तो उसे वही सजा मिलेगी जो ऐसा कंटेंट सीधे अपलोड करने पर मिलती है.

ब्रिटेन की तीखी प्रतिक्रिया
यूरोप के अधिकारियों और टेक कैंपेनर्स ने ग्रोक के फीचर्स को पेड यूज़र्स तक सीमित करने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के कार्यालय ने इस कदम को “पीड़ितों के लिए अपमानजनक” और “समस्या का समाधान नहीं” बताया. 

एक्स अधिकारियों को समन जारी
इंडोनेशिया के संस्कृति और डिजिटल मामलों के मंत्रालय ने बताया कि उसने एक्स के अधिकारियों को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तलब किया है. करीब 28.5 करोड़ आबादी वाले इस देश में ऑनलाइन अश्लील कंटेंट साझा करने पर पहले से ही कड़े नियम लागू हैं, और सरकार इन कानूनों के पालन को लेकर कोई ढील देने के मूड में नहीं है.

 

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