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US-Russia Nuclear War Risk: तेल का 'खेल'! केंद्र में वेनेजुएला... आमने-सामने रूस और अमेरिका... कहीं छिड़ न जाए परमाणु युद्ध 

अमेरिका द्वारा रूसी झंडे वाले तेल टैंकर मरीनेरा को जब्त करने के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में ठन गई है. रूस ने अमेरिका को परमाणु हमले की धमकी तक दे दी है. अमेरिका और रूस में तनाव चरम पर है. ऐसे में संभावना व्यक्त की जा रही है कि कहीं दोनों महाशक्तियों में परमाणु युद्ध ने छिड़ जाए.

Tension between Vladimir Putin and Donald Trump (File Photo: PTI) Tension between Vladimir Putin and Donald Trump (File Photo: PTI)

दुनिया की दो महाशक्तियां रूस और अमेरिका में कभी नहीं बनी है. अमेरिका का युद्ध में यूक्रेन का साथ देने के बाद तो रूस को फूटी आंख भी यूएस सुहाता नहीं है. ऊपर से अब अमेरिका ने रूसी झंडे वाले तेल टैंकर मरीनेरा को जब्त कर लिया है. इसके बाद तो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) में ठन गई है. 

पुतिन के लिए यूएस की ये कार्रवाई भारी बेइज्जती जैसी है. पुतिन ने अटलांटिक में अपने तेल टैंकरों को अमेरिका से बचाने के लिए वेनेजुएला के पास परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत भेजे हैं. इतना ही नहीं, रूस ने अमेरिका को परमाणु हमले की धमकी तक दे दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी पिछे हटने के मूड में नहीं हैं. उन्होंने डूम्सडे विमान एक्टिव कर दिया है. अपने रक्षा बजट को और बढ़ाने की तैयारी में है. इस तरह से अमेरिका और रूस में तनाव चरम पर है. ऐसे में संभावना व्यक्त की जा रही है कि तेल के 'खेल' से परमाणु युद्ध भी छिड़ सकता है. उधर,  वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाकर ले जाने के बाद पूरी दुनिया दो धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है. ऐसे में तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई पड़ रही है.

रूस ने अमेरिकी कार्रवाई पर दी तीखी प्रतिक्रिया 
आइए उस तेल टैंकर की अब कहानी जानते हैं, जिसे अमेरिका द्वारा जब्त कर लेने के बाद ट्रंप और पुतिन में दुश्मनी परमाणु युद्ध तक पहुंच गई है. दरअसल, अमेरिका की कोस्ट गार्ड और सेना ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में संयुक्त ऑपरेशन चलाकर रूसी झंडे वाले तेल टैंकर मरीनेरा को जब्त किया है. अमेरिका दावा कर रहा है कि यह टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर अवैध रूप से वेनेजुएला का तेल ले जा रहा था. आपको मालूम हो कि यह वही टैंकर है जिसका पुराना नाम बेला-1 (Bella-1) था, जिस पर अमेरिका ने साल 2024 में प्रतिबंध लगाया था.

बाद में इसका नाम बदलकर मरीनेरा कर दिया गया. रूस ने यूएस द्वारा मरीनेरा को जब्त करने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. रूसी सीनेटर एंड्री क्लिशस ने इसे खुले समुद्र में घोर समुद्री डकैती करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है. रूस ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी देश को दूसरे देश के विधिवत पंजीकृत जहाज के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है.रूसी स्टेट ड्यूमा की रक्षा समिति के पहले डिप्टी हेड और पुतिन के बेहद करीबी एलेक्सी जुरालेव ने कहा कि अमेरिका पर टॉरपीडो से हमला कर दो. अमेरिका पर परमाणु बम गिरा दो या फिर अटलांटिक में अमेरिका की कुछ नावों को हमला करके डुबा दो. 

अमेरिका ने रूसी तेल टैंकर जब्त कर चीन को भी दी तगड़ी चोट
आपको मालूम हो कि रूसी झंडे वाले तेल टैंकर मरीनेरा को जब्त कर अमेरिका ने चीन को भी तगड़ी चोट दी है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर रूस के तेल टैंकर जब्त करने से चीन को कैसे चोट लगी है तो आइए हम आपको बताते हैं. दरअसल, दरअसल रूसी शैडो फ्लीट का ये टैंकर वेनेजुएला से कच्चा तेल लोड करके चीन ले जाने वाला था.

इसका मतलब है कि वेनेजुएला से तेल की सप्लाई चीन को होनी थी जबकि अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल लेने पर प्रतिबंध लगा रखा है. यूएस के प्रतिबंधों के बावजूद चीन इस समुद्री रास्ते से चोरी-छिपे रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है. अब अमेरिका इसे बंद करना चाहता है. अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला के तेल पर दुश्मनों का कब्जा नहीं होने देंगे. इससे रूस और चीन के बीच तेल व्यापार को बड़ा नुकसान हो सकता है. रूस-अमेरिका के बीच हुई इस जुबानी फायरिंग के केंद्र में वेनेजुएला है.

पुतिन का चढ़ा हुआ है पारा, भेजा समंदर का ‘यमराज’ 
रूसी झंडे वाले तेल टैंकर मरीनेरा के जब्त करने के बाद राष्ट्रपति पुतिन का पारा चढ़ा हुआ है. पुतिन ने अपने तैल टैंकरों को अमेरिका से बचाने के लिए अटलांटिक महासागर में वेनेजुएला के पास परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत भेजे हैं. हालांकि यह रूसी नॉर्दर्न फ्लीट का हिस्सा है लेकिन, पूरी दुनिया में उस पनडुब्बी की चर्चा हो रही है, जिसे समंदर का ‘यमराज’ कहा जाता है. जी हां, रूस ने अपनी परमाणु पनडुब्बी BS-329 बेलगोरोद को गश्त करने के लिए भेजा है.

आपको मालूम हो कि यह पनडुब्बी विश्व की सबसे लंबी और रहस्यमयी पनडुब्बी है. इस पनडुब्बी पर 100 मेगाटन न्यूक्लियर पेलोड भरा है. यह पनडुब्बी दुनिया की इकलौती सुपर टॉरपीडो, अंडर वाटर ड्रोन पोसाइडन ले जाने में सक्षम है. जिसको इस सबमरीन से लॉन्च करके रूस समुद्र के नीचे 500 मीटर ऊंची रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा कर सकता है. यदि रूस ऐसा करता है तो अमेरिका के तटीय शहर कब्रिस्तान बन जाएंगे. ऐसा माना जाता है कि रूस के इस परमाणु पनडुब्बी का तोड़ दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है. अमेरिका के पास भी इस पनडुब्बी से पार पाने का हल नहीं है. 

अमेरिका ने बोइंग E-4B Nightwatch को किया एक्टिव
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी परमाणु पनडुब्बी से बचाव के लिए डूम्सडे विमान बोइंग E-4B Nightwatch को एक्टिव कर दिया है. इस विशालकाय विमान को वाशिंगटन डीसी के बाहर Camp Springs एयरफील्ड में उतरा गया है. आपको मालूम हो कि अमेरिका ने बोइंग E-4B Nightwatch का उपयोग 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले के समय किया था. उसी समय से इसे अति संवेदनशील स्थितियों में ही एक्टिवेट किया जाता है.

इस विमान की खासियत यह है कि यह परमाणु युद्ध के समय हवाई कमांड सेंटर बन जाता है. यह बहुत ही लो फ्रीक्वेंसी और हाई फ्रीक्वेंसी एंटेना से लैस है जो न्यूक्लियर संघर्ष के दौरान भी ग्लोबल कम्युनिकेशन बनाए रखता है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि परमाणु विस्फोट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स जैसे खतरों को झेल सके. बोइंग E-4B Nightwatch एक तरह से उड़ता किला है. इसमें एक समय में 110 से अधिक लोग सवार हो सकते हैं.

किसके पास कितने परमाणु हथियार
आपको मालूम हो कि रूस के पास लगभग 5580 परमाणु हथियारों का जाखिरा है. इसमें से 1710 तैनात हैं. इन्हें मिसाइलों, पनडुब्बियों और बमवर्षक विमानों तैनात किया गया है. बाकी रिजर्व या रिटायर्ड हैं. उधर, अमेरिका में लगभग 5428 परमाणु हथियार हैं. इनमें से 1644 तैनात हैं, जो मिसाइलों और बमों में इस्तेमाल के लिए तैयार हैं. दोनों देशों के पास हथियारों की संख्या लगभग बराबर है, लेकिन इस्तेमाल के लिए तैयार हथियारों में मामूली अंतर है. रूस के पास थोड़ा ज्यादा जखीरा है, लेकिन अमेरिका ने अपने हथियारों को मॉडर्न करने पर ज्यादा ध्यान दिया है. 

वेनेजुएला पर हमले के बाद दो खेमे में बंटी दुनिया
अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर यूएस ले जाने की घटना के बाद दुनिया दो खेमे में बंटी हुई है. अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ रूस, चीन, ब्राजील, ईरान, क्यूबा, कोलंबिया, चिली, मेक्सिको, बेलारूस, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, उरुग्वे, स्लोवाकिया, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, सिंगापुर और घाना जैसे देश हैं. उधर, अमेरिका के समर्थन में अर्जेंटीना, इजराइल, ब्रिटेन, पेरू, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, अल्बानिया आदि है. भारत ने इस मामले को दोनों देशों से शांति से हल करने की अपील की है.