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UNSC में स्थाई सदस्यता के लिए V4 का मिला समर्थन, 32 सालों से भारत कर रहा मांग

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थाई सदस्यता के लिए भारत 32 सालों से दावेदारी ठोक रहा है. अब यूरोप के 4 देशों ने भी भारत का समर्थन कर दिया है. V4 के देश हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भारत के रूख का समर्थन किया है.

India's meeting with V4 group countries (Photo/@DrSJaishankar)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट के लिए भारत काफी वक्त से दावेदारी ठोक रहा है. लेकिन अब तक किसी ना किसी वजह से ये संभव नहीं हो पाया है. भारत को इस मुद्दे पर लगातार दुनियाभर के देशों का समर्थन मिलता रहा है. अब यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में स्थाई सदस्यता के लिए भारत को विसेग्राड ग्रुप (V4) का समर्थन मिला है. इस ग्रुप में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य शामिल हैं.

V4 का UNSC में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन- 
अब यूरोप के 4 देशों ने भारत की स्थाई सदस्यता का जोरदार समर्थन किया है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान V4 ग्रुप के साथ भारत की पहली बैठक हुई. इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चर्चा की. इस मुलाकात के बाद स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि वी4 देशों के तौर पर हम सभी इस बात से सहमत हैं कि ग्लोबल साउथ हिस्सा और हिंदू प्रशांत क्षेत्र में उभरती हुई महाशक्ति होने के बाद भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य के तौर पर वहां शामिल होना चाहिए.

32 साल से भारत कर रहा दावेदारी-
भारत पिछले 3 दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए दावेदारी पेश कर रहा है. पहली बार भारत ने साल 1994 में यूएन की 49वीं महासभा के दौरान स्थाई सीट की मांग उठाई थी. इसके बाद साल 2000 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने स्थाई सदस्यता का मुद्दा उठाया था. भारत का तर्क रहा है कि साल 1945 में सुरक्षा परिषद के गठन के बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. लेकिन इस दौरान दुनिया काफी बदल चुकी है. सुरक्षा परिषद में उन देशों का प्रतिनिधित्व भी होना चाहिए, जिनकी आबादी और अर्थव्यवस्था दुनिया में प्रभावी है.

UNSC के स्थाई और अस्थाई सदस्य-
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थाई सदस्य हैं और 10 अस्थाई सदस्य हैं. अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल 2 साल होता है. स्थाई सदस्यों में अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और चीन शामिल हैं. जबकि वर्तमान में 10 अस्थाई सदस्यों में सोमालिया, डेनमार्क, ग्रीस, पाकिस्तान, पनामा, बहरीन, कोलंबिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, लातविया और लाइबेरिया शामिल हैं.

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