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गुस्सा या क्रोध हर व्यक्ति को आता है, लेकिन जब गुस्सा बार-बार आने लगे या छोटी-छोटी बात पर व्यक्ति अपना नियंत्रण खोने लगे, तो यह परेशानी का कारण बन सकता है. ज्योतिष और हस्तरेखा शास्त्र में क्रोध के पीछे कुछ ग्रहों और हाथ की रेखाओं को जिम्मेदार माना गया है.
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है. मान्यता है कि चंद्रमा कमजोर होने पर व्यक्ति के मन और वाणी पर नियंत्रण कम हो सकता है. यदि चंद्रमा पर मंगल या सूर्य जैसे अग्नि तत्व वाले ग्रहों का प्रभाव हो, तो व्यक्ति के स्वभाव में गुस्सा अधिक दिखाई दे सकता है. मंगल के कमजोर या अग्नि तत्व की राशि में होने को भी क्रोध से जोड़ा जाता है.
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में दोपहर के समय जन्म लेने वाले लोगों में भी गुस्सा अधिक होने की बात कही जाती है. मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, धनु और कुंभ राशि के लोगों को भी सामान्य रूप से अधिक क्रोध वाला बताया जाता है.
हस्तरेखा शास्त्र में हथेली के रंग और कुछ पर्वतों को भी क्रोध से जोड़ा जाता है. माना जाता है कि हथेली का रंग बहुत गहरा या साफ न होना व्यक्ति के गुस्सैल स्वभाव का संकेत हो सकता है. मंगल पर्वत पर क्रॉस या जाल जैसी आकृति को भी क्रोध से जोड़ा जाता है. हथेली के बीच या नीचे तिल होना और अंगूठे का छोटा या अधिक मोटा होना भी जल्द गुस्सा आने के संकेत माने जाते हैं.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल का बुध की राशि में होना क्रोध को हिंसक रूप दे सकता है. मंगल के साथ शनि या सूर्य का प्रभाव होने पर लड़ाई-झगड़े की प्रवृत्ति बढ़ने की बात कही जाती है.
मजबूत मंगल और कमजोर चंद्रमा को भी गुस्से में खुद को नुकसान पहुंचाने से जोड़ा जाता है. शनि की साढ़ेसाती और राहु के अधिक प्रभाव को भी क्रोध से जुड़े कठिन समय के रूप में देखा जाता है.
क्रोध कम करने के लिए हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर माना जाता है. ज्योतिषीय उपायों में प्याज और लहसुन का कम इस्तेमाल करने, दोपहर में दही लेने और रसदार फलों को भोजन में शामिल करने की सलाह दी जाती है. कुछ लोग एकादशी का व्रत भी रखते हैं.
घर को साफ-सुथरा और हवादार रखें. घर में पर्याप्त सूर्य का प्रकाश आने दें. चंदन की खुशबू वाली अगरबत्ती का इस्तेमाल किया जा सकता है. मान्यता है कि अधिक क्रोध करने वाले व्यक्ति को घर के आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में रहने से बचना चाहिए.
सुबह सूर्योदय से पहले उठना और उगते सूर्य को जल देना ज्योतिष में शुभ माना जाता है. नहाने के पानी में गुलाब जल मिलाने की भी सलाह दी जाती है. कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में ग्रहों की स्थिति के अनुसार रत्न पहनने और चांदी की चेन धारण करने की बात कही गई है.