Hand Signs
Hand Signs
हाथ और पैर हमारी कुंडली की तरह होते हैं और उनमे पाए जाने वाले चिह्न योगों को बताते हैं. पंडित शैलेंद्र पांडेय के मुताबिक हाथ पैरों में बनने वाले चिह्न दो तरह के होते हैं. एक जो हमेशा रहते हैं और दूसरे जो आते-जाते रहते हैं. जो चिह्न आते-जाते रहते हैं, वो एक समय की विशेष दशा बताते हैं. वैसे चिह्न जो हमेशा रहते हैं, वो उस व्यक्ति के बारे में सारी विशेषताएं बताते हैं. इन चिह्नों की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इन चिह्न का स्वतंत्र होना जरूरी है.
कौन से चिह्न हैं साधारण और क्या है इनका अर्थ
वर्ग: वर्ग रेखाओं पर भी पाए जाते हैं और पर्वतों पर भी, यह जहां पर भी हों सुरक्षा ही प्रदान करती हैं लेकिन शुक्र पर होने पर जेल यात्रा का कारण बनते हैं.
त्रिभुज: त्रिभुज भी कहीं भी पाए जा सकते हैं, पर जिस पर्वत पर पाए जाते हैं, उसके प्रभाव को बढ़ा देते हैं.
तारा: हाथ या पैर में जहां भी हो, उस स्थान को नुकसान पहुंचाता है लेकिन सूर्य के पर्वत पर अतीव यश देता है.
वलय: यह जहां होते हैं, वहां की चीजों का शुभ प्रभाव रोक देते हैं. सूर्य पर सबसे बुरा होता है और बृहस्पति पर सबसे अच्छा.
तिल: केवल हथेली के बीचों बीच ही अच्छा होता है. अन्य जगह पर बिलकुल नहीं, अगर तलवे में हो तो खूब दौड़ भाग करनी होती है.
कौन से चिह्न हैं विशेष, कहां पाए जाते हैं और क्या है इनका अर्थ
शंख: अंगुलियों के पोरों पर शंख पाए जाते हैं, यह विद्वता और ज्ञान का चिह्न है.
चक्र: यह भी अंगुलियों के पोरों पर पाए जाते हैं. यह धन संपत्ति के द्योतक होते हैं.
त्रिशूल: बृहस्पति के पर्वत पर, शनि के पर्वत पर या ह्रदय रेखा पर, यह अपार शक्ति तथा यश का चिह्न है.
मंदिर: आम तौर पर शुक्र या राहु के पर्वत पर पाया जाता है. यह दैवीय कृपा का चिह्न है. आध्यात्मिक संस्कारों के बारे में बताता है.
मछली: जीवन रेखा पर मणिबंध के पास पाई जाती है या पैरों के बीचों बीच में यह यात्राओं और यात्राओं से लाभ का चिह्न है.
कमल: अतीव दुर्लभ चिह्न है. पैरों के मध्य में या हाथों में शुक्र पर्वत पर होता है. यह इस बात का संकेत है कि जिसके पास यह चिह्न है. वह स्वयं ईश्वर या ईश्वर के काफी नजदीक का व्यक्ति है.
हाथ में या पैरों में हों बुरे चिह्न तो कैसे उनका दुष्प्रभाव खत्म करें
पैरों में या हाथों में शनिवार को काला धागा बांधें. हाथों में जल भरकर अंजुली से पौधों में जल डालें. सुबह उठकर अपनी हथेलियों को सबसे पहले देखना चाहिए. फिर भूमि का स्पर्श करना चाहिए. माता-पिता का चरण रोज छूने से भी इनका दुष्प्रभाव कम होता है.