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मोची के खाते से 80 करोड़ का खेल, 656 शिकायतों वाला अकाउंट बना ठगी का जरिया... फिर हुआ बड़ा खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया कि इस गैंग ने एक साधारण मोची के बैंक खाते का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया. हैरानी की बात यह है कि इस एक ही खाते से करीब 80 करोड़ रुपये का टर्नओवर हुआ और 656 बार साइबर ठगी की रकम इसमें ट्रांसफर की गई. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.

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कानपुर में साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस जांच में सामने आया कि इस गैंग ने एक साधारण मोची के बैंक खाते का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया. हैरानी की बात यह है कि इस एक ही खाते से करीब 80 करोड़ रुपये का टर्नओवर हुआ और 656 बार साइबर ठगी की रकम इसमें ट्रांसफर की गई. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है. 

दरअसल, मामले की शुरुआत 26 जनवरी को हुई, जब दवा कारोबारी अमित राठौर ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें एक लिंक के जरिए शेयर ट्रेडिंग का लालच देकर 13 लाख रुपये ठग लिए गए. पुलिस ने जब जांच शुरू की तो रकम जिस खाते में गई थी, वह अजय नाम के व्यक्ति का निकला. आगे की जांच में पता चला कि यह खाता दिल्ली के नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में संचालित था और एनसीआरबी में इस खाते से जुड़ी 656 शिकायतें दर्ज हैं.

मोची निकला मास्टरमाइंड
पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर गठित टीम ने जांच को आगे बढ़ाया तो खुलासा हुआ कि इस खाते में अलग-अलग बैंकों से ठगी की रकम ट्रांसफर होकर आती थी. सिर्फ उत्तर प्रदेश से ही इस खाते में 26 करोड़ रुपये भेजे गए थे. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खाते का मालिक अजय पेशे से मोची है, जिसे दिल्ली पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है.

कानपुर पुलिस ने इस गैंग के दो अन्य सदस्यों गुलशन और करन को गिरफ्तार किया है. गुलशन इलेक्ट्रिशियन है, जबकि करन ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाता है. पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के कुछ मास्टरमाइंड अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है. जांच में यह भी पता चला कि गैंग लोगों के खातों का इस्तेमाल करने के लिए 60-40 का समझौता करता था. ठगी की रकम आम लोगों के खातों में भेजी जाती थी, जिसमें 40 प्रतिशत हिस्सा गैंग रखता था और 60 प्रतिशत खातेधारक को दिया जाता था. पुलिस ने आरोपियों के पास से कई चेकबुक, एटीएम कार्ड और अहम दस्तावेज बरामद किए हैं.

रिपोर्टर: रंजय सिंह

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