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अगर आप कम पैसे में अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो फ्लेक्स प्रिंटिंग का काम एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. दुकानों, स्कूलों, कोचिंग सेंटर, अस्पतालों और अलग-अलग कार्यक्रमों में बैनर और पोस्टर की जरूरत रहती है. इसलिए इस काम में लोकल बाजार से लगातार ऑर्डर मिलने के चांस बने रहते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि शुरुआत में आपको महंगी प्रिंटिंग मशीन भी खरीदने की कोई जरूरत नहीं है.
डिजाइन आपका लेकिन प्रिटिंग कही और!
शुरुआत में आप बिना मशीन खरीदे भी फ्लेक्स प्रिंटिंग का काम कर सकते हैं. इसके लिए एक छोटा कमरा या दुकान, कंप्यूटर या लैपटॉप और डिजाइन बनाने की बेसिक जानकारी जरूरी है. इसमें CorelDRAW या Photoshop जैसे डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर की जानकारी आपके काम आ सकती है.
इस मॉडल में ग्राहक से ऑर्डर लेने के बाद आप उसका डिजाइन तैयार कर सकते हैं. इसके बाद किसी बड़ी प्रिंटिंग कंपनी से फ्लेक्स प्रिंट करवाकर ग्राहक को दे सकते हैं. प्रिंटिंग की कीमत और ग्राहक से ली गई रकम के बीच जो अंतर बचता है, वही आपका मुनाफा हो सकता है. इस तरह शुरुआत में करीब 30 हजार रुपए की रकम से काम शुरू कर सकते हैं.
अपना प्रिंटिंग सेटअप लगाने में कितना खर्च?
अगर काम बढ़ने के बाद आप खुद की मशीन लगाना चाहते हैं, तो निवेश काफी बढ़ सकता है. छोटे स्तर पर मशीन, कंप्यूटर और इन्वर्टर के साथ करीब 5 से 6 लाख रुपए में सेटअप तैयार किया जा सकता है. वहीं बड़े स्तर पर हाई-स्पीड मशीन, एसी और स्टाफ सहित करीब 20 लाख रुपए तक का खर्च हो सकता है.
कितना होता है काम में प्रोफिट मार्जिन?
फ्लेक्स प्रिंटिंग बिजनेस में करीब 25 से 30 फीसदी तक का प्रॉफिट मार्जिन होता है. हालांकि कमाई आपके ऑर्डर की क्वांटिटी और उनके साइज पर भी होती है. लगतार ऑर्डर मिलने पर बड़े सेटअप से हर महीने करीब 1.5 से 2 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं.
कहां से आएगा आपके पास काम?
कस्टूमर्स आपको स्कूल, कोचिंग सेंटर, अस्पताल, सरकारी कार्यालय, दुकानदार और स्थानीय कार्यक्रम के जरिए मिलेंगे. इस कार्यक्रमों को आयोजित करने वाले लोग बड़े-बड़े बोर्ड और बैनर तैयार करवाते हैं. साथ ही शादी, जन्मदिन और दूसरे कार्यक्रमों के लिए भी बैनर और फ्लेक्स की जरूरत पड़ती है.
अगर कभी काम को बड़ा करें और मशीन भी खुद की खरीदें तो, तो केवल कीमत देखकर फैसला न करें. मशीन की प्रिंटिंग पावर, सर्विस, वारंटी, स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव का खर्च जरूर देखें.