credit card
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पिछले कुछ वर्षों में भारत में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है. कार्डधारकों की संख्या के साथ-साथ कार्ड पर बकाया रकम भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है. सुविधा और आसान भुगतान के नाम पर लिया गया यह साधन अब कई लोगों की वित्तीय सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है. कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी महीने की कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ कार्ड के बिल चुकाने में ही निकल जाता है.
क्रेडिट कार्ड अपने आप में कोई बुरी चीज़ नहीं है. सही योजना और अनुशासन के साथ इसका इस्तेमाल किया जाए, तो यह खर्चों को मैनेज करने और क्रेडिट स्कोर सुधारने में मदद करता है. दिक्कत तब शुरू होती है, जब लोग अपनी आमदनी से ज़्यादा खर्च करने लगते हैं और हर महीने केवल 'मिनिमम ड्यू' भरकर निश्चिंत हो जाते हैं. उन्हें यह अंदाज़ा नहीं होता कि बची हुई रकम पर 30% से 45% तक सालाना ब्याज जुड़ता रहता है, जो कुछ ही महीनों में छोटे बकाया को बड़े कर्ज में बदल देता है.
एक कार्ड से दूसरा कार्ड भरने का खतरनाक चक्र
कई लोग एक क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने के लिए दूसरे कार्ड का इस्तेमाल करने लगते हैं. शुरुआत में यह आसान समाधान लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत कर्ज के ऐसे जाल में बदल जाती है, जहां से निकलना मुश्किल हो जाता है. अगर आप भी हर महीने पूरा बिल नहीं भर पा रहे हैं या खर्च चलाने के लिए अगली सैलरी का इंतजार कर रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि अब सतर्क होने का समय आ गया है.
सबसे पहले अपने सभी क्रेडिट कार्ड से जुड़ी पूरी जानकारी एक जगह लिखें. इसमें हर कार्ड का कुल बकाया, ब्याज दर, मिनिमम अमाउंट ड्यू और भुगतान की आख़िरी तारीख शामिल होनी चाहिए. जब पूरी तस्वीर सामने होगी, तभी आप सही रणनीति बना पाएंगे.
जब तक खर्च रुकेगा नहीं, कर्ज घटेगा नहीं
अगला ज़रूरी कदम है कुछ समय के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना. रोज़मर्रा के खर्चों के लिए डेबिट कार्ड, यूपीआई या नकद का सहारा लें. जब नया खर्च बंद होगा, तभी पुराने कर्ज को कम करने की प्रक्रिया सही मायने में शुरू हो पाएगी.
कर्ज चुकाने के दो असरदार तरीके
बैंक से बातचीत करने में न हिचकें
कई लोग यह नहीं जानते कि बैंक से बात करके भी राहत पाई जा सकती है. आप अपने कार्ड जारी करने वाले बैंक से ब्याज दर कम कराने, बकाया रकम को EMI में बदलने या बैलेंस ट्रांसफर जैसे विकल्पों के बारे में पूछ सकते हैं. कुछ मामलों में कम ब्याज वाला पर्सनल लोन लेकर सभी कार्ड का कर्ज एक जगह समेटना भी फायदेमंद हो सकता है.