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Success Story: मुंबई में ऑटो चलाते रहे पिता, बेटे को कोटा भेजकर डॉक्टर बनाने का सपना किया पूरा, NEET में AIR 3864 लाकर जौनपुर के प्रभात ने KGMU में लिया दाखिला

एक पिता ने ऑटो चलाकर अपने बेटे को पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बना दिया है. NEET में AIR 3864 लाकर जौनपुर के प्रभात ने KGMU में दाखिला लिया है. प्रभात की सफलता में उनके पिता का भी बहुत बड़ा रोल रहा है. यहां आप जान सकते हैं कैसे प्रभात ने गांव में पढ़ाई से कोटा तक का सफर तय किया. 

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Prabhat secured admission to KGMU after achieving an AIR of 3864 in NEET Prabhat secured admission to KGMU after achieving an AIR of 3864 in NEET

कोटा की कोचिंग ने एक बार फिर सीमित संसाधनों वाले परिवार के बेटे के डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी है. उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के देवकीपुर गांव के रहने वाले प्रभात कुमार यादव ने NEET UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक 3864 हासिल कर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), उत्तर प्रदेश के लखनऊ कैंपस में एमबीबीएस में दाखिला लिया है. प्रभात की इस सफलता के पीछे उसके पिता की करीब दो दशक की मेहनत, परिवार का सहयोग और कोटा में मिली कोचिंग का अहम योगदान रहा.

पिता की मेहनत और त्याग को दिया सम्मान  
प्रभात के पिता महेंद्र कुमार यादव पिछले करीब 20 वर्षों से मुंबई में ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. परिवार से दूर मुंबई की एक छोटी चॉल में रहकर उन्होंने मेहनत की और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया. वहीं प्रभात के दादा इन्द्र बहादुर यादव, मां बंशराजी और भाई-बहन गांव में ही रहते हैं. प्रभात की सफलता की खबर मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पिता भावुक नजर आ रहे हैं, जबकि दादा इन्द्र बहादुर यादव पोते की कामयाबी की खुशी में नाचते दिखाई दे रहे हैं. दादा का कहना है कि प्रभात ने अपनी सफलता के जरिए अपने पिता की मेहनत और त्याग को सम्मान दिया है.

गांव में पढ़ाई से कोटा तक का सफर
प्रभात ने शुरुआती पढ़ाई अपने गांव में रहकर की. उसने कक्षा 10वीं में 89.44 प्रतिशत और 12वीं में 83.44 प्रतिशत अंक हासिल किए. डॉक्टर बनने के लक्ष्य को लेकर वह करीब दो साल तक कोटा में रहा और एलन करियर इंस्टीट्यूट के क्लासरूम प्रोग्राम से NEET की तैयारी की. प्रभात को संस्थान की ओर से 50 प्रतिशत फीस में रियायत मिली. बची हुई फीस भी उसके पिता ने किस्तों में जमा की. पढ़ाई के दौरान रहने और खाने की व्यवस्था उसके मामा दयाराम यादव ने संभाली. सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभात ने अपनी तैयारी जारी रखी. NEET के पहले प्रयास में प्रभात ने 504 अंक हासिल किए थे. इसके बाद उसने अपनी कमियों पर काम करते हुए तैयारी को और मजबूत किया. NEET UG 2026 में उसने 627 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक 3864 प्राप्त की.

डॉक्टर बनकर गांव और समाज की सेवा करना चाहता है प्रभात
प्रभात का कहना है कि उसकी सफलता में परिवार की मेहनत और एलन कोटा के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही. अब वह एक अच्छा डॉक्टर बनकर अपने गांव और समाज की सेवा करना चाहता है. प्रभात की कामयाबी से देवकीपुर गांव के अलावा आसपास के करीब चार गांवों में भी उत्साह का माहौल है. ग्रामीण, रिश्तेदार और क्षेत्रवासी परिवार को लगातार बधाइयां दे रहे हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभात ने जिस तरह NEET में सफलता हासिल की है, उससे क्षेत्र के दूसरे विद्यार्थियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है. अब गांव के कई बच्चे प्रभात से अपने करियर और पढ़ाई को लेकर सलाह लेने पहुंच रहे हैं.

कोटा बच्चों के सपनों को दे रहा नई दिशा
एलन के फाउंडर डॉ. नवीन माहेश्वरी ने प्रभात की सफलता पर कहा कि कोटा बच्चों के सपनों को पूरा करने में मदद कर रहा है. प्रतिभाओं को उचित मार्गदर्शन और अवसर देकर उन्हें आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चे अपने परिवार के साथ-साथ समाज और देश के लिए भी प्रेरणा बनते हैं और एलन ऐसे विद्यार्थियों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहता है.