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क्या होता है NAAC ग्रेड, जिससे तय होती है कॉलेजों की क्वालिटी, जानिए छात्रों को क्या होता है फायदा

NAAC Grade: नैक ग्रेडिंग के जरिए शिक्षण संस्थानों की सही जानकारी स्टूडेंट्स को मिलती है. जिससे उनको अपने लिए बेहतर कॉलेज चुनने में मदद मिलती है. नैक से कॉलेजों का मूल्यांकन जरूरी है. इसके बिना कोई भी कॉलेज सरकारी मदद नहीं पा सकता है.

NAAC ग्रेडिंग से तय होती है कॉलेजों की क्वालिटी NAAC ग्रेडिंग से तय होती है कॉलेजों की क्वालिटी
हाइलाइट्स
  • NAAC करती है कॉलजों की ग्रेडिंग

  • नैक ग्रेडिंग से छात्रों को मिलती है मदद

यूजीसी की गाइडलाइन के तहत राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को रेटिंग दी है. ये पहला अवसर है जब उत्तर प्रदेश के किसी राज्य विश्वविद्यालय को ग्रेड ए मिला है. ग्रेड ए की रैंक मिलने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी है. सीएम योगी ने इस खुशी को ट्विटर पर शेयर किया और प्रदेश के लोगों को बधाई दी.

क्या है NAAC ग्रेडिंग-
NAAC यूजीसी का एक हिस्सा है. इसका काम देशभर के विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों, निजी संस्थानों में गुणवत्ता को परखना और उनको रेटिंग देना है. यूजीसी की नई गाइडलाइन के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिएशन काउंसिल से मान्यता प्राप्त करना जरूरी है. अगर किसी संस्थान ने इसकी मान्यता नहीं ली है तो उसे किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा. 

क्या है ग्रेडिंग प्रक्रिया-
सबसे पहले शिक्षण संस्थान नैक की गुणवत्ता पर खरा उतरने के लिए तैयारी करते हैं. इसके बाद संस्थान नैक ग्रेडिंग के लिए आवेदन करते हैं. आवेदन करने के बाद नैक की टीम संस्थान का दौरा करती है. उसका निरीक्षण करती है. इस दौरान टीम कॉलेज में शिक्षण सुविधाएं, नतीजे, इंफ्रास्ट्रक्चर और कॉलेज का माहौल जैसी का निरीक्षण करती है. इसी आधार पर नैक की टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करती है. इससे कॉलेज को सीजीपीए दिया जाता है और इसी के आधार पर ग्रेड जारी होते हैं. 

ग्रेड 4 साल के लिए मान्य-
NAAC के तहत कॉलेजों को 4 साल के लिए ग्रेड दिए जाते हैं. चार साल बाद फिर से रेटिंग दी जाती है. नैक ने अस्थाई ग्रेड देने की भी व्यवस्था की है. इसके तहत 2 साल के लिए ग्रेड दी जाएगी. अगर कोई कॉलेज प्रबंधन ग्रेड से संतुष्ट नहीं है तो 6 महीने में कमियों को दूर करके दोबारा निरीक्षण करवा सकता है. लेकिन इसके लिए 10 हजार का शुल्क जमा करना होगा. इसके तहत ये ग्रेड सिर्फ 2 साल के लिए मान्य होगी.

CGPA के आधार पर होती है ग्रेडिंग-
यूजीसी ने ग्रेडिंग पैटर्न बदल दिया है. पहले चार श्रेणियों में कॉलेजों को रखा जाता था. लेकिन अब 8 श्रेणियों में रखा जाने लगा है. अगर सीजीपीए 3.76 से 4 के बीच है तो कॉलेज को ए प्लस प्लस ग्रेड मिलता है. इसका मतलब है कि कॉलेज सबसे बेहतर है. इसी तरह से सीजीपीए के आधार पर एक प्लस, ए, बी प्लस प्लस, बी प्लस, बी, सी और डी ग्रेड दिए जाते हैं.

स्टूडेंट्स को क्या होता है फायदा-
नैक रेटिंग से स्टूडेंट्स को शिक्षण संस्थान के बारे में सही जानकारी मिलती है. छात्रों को संस्थान के बारे में शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान, बुनियादी ढांचा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी जानकारी हासिल करने में आसानी होती है. नैक ग्रेडिंग के जरिए छात्र अपने लिए बेहतर कॉलेज तलाश कर सकते हैं. इतना ही नहीं, नैक ग्रेड शिक्षण संस्थानों की दी गई डिग्रियों का मूल्य भी निर्धारित करते हैं.

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