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Gaya Lok Sabha Seat: कभी था Congress का गढ़, अभी है NDA का दबदबा, 1999 से मांझी जाति का कब्जा, गया लोकसभा सीट का जानिए इतिहास

Lok Sabha Election 2024 Gaya Seat: गया लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी. यहां से कांग्रेस ने पांच बार जीत हासिल की है. लेकिन 1984 के बाद से इस सीट से कांग्रेस को कभी जीत नसीब नहीं हुई. यहां के वर्तमान सांसद जदयू के विजय कुमार मांझी हैं. इस बार एनडीए गठबंधन में यह सीट हम के खाते में गई है.

Gaya Lok Sabha Seat Gaya Lok Sabha Seat
हाइलाइट्स
  • गया में पहले चरण में 19 अप्रैल 2024 को होगा मतदान 

  • NDA की तरफ से उम्मीदवार हैं जीतन राम मांझी 

Bihar Politics: लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) को लेकर सभी पार्टियों ने बिगुल फूंक दिया है. एनडीए (NDA) हो या इंडिया (INDIA) गठबंधन दोनों के नेता दिल्ली का किला फतह करने में जुट गए हैं. पीएम मोदी (PM Modi) के नेतृत्व में जहां बीजेपी (BJP) लगातार तीसरी बार सत्ता पर काबिज होने के लिए पूरा जोर लगा रही है. वहीं, इंडिया गठबंधन (India Alliance) से जुड़े दल उलटफेर करने की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं. आज हम आपको बिहार के गया लोकसभा सीट का सियासी समीकरण और इतिहास बताने जा रहे हैं. इस सीट से प्रदेश के पूर्व मंत्री  जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ताल ठोक रहे हैं.

इस बार कुल 14 उम्मीदवार अपना रहे अपनी किस्मत
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) एनडीए गठबंधन में शामिल हैं. इस बार हम के खाते में गया लोकसभा सीट गई है. इस लोकसभा सीट से कुल 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत अजमा रहे हैं. यहां मुख्य मुकाबला जीतन राम मांझी और RJD के कुमार सर्वजीत के बीच माना जा रहा है. इनके अलावा 5 अन्य दलीय उम्मीदवार और बाकी 7 निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं. गया लोकसभा सीट पर 1999 से मांझी जाति का कब्जा रहा है. अब देखना है कि क्या  जीतन राम जीत दर्ज कर मांझी जाति वर्चस्व कायम रख पाने में सफल होते हैं या नहीं. 

गया लोकसभा सीट का क्या है इतिसाह
आजादी के बाद देश में पहली बार साल 1952 में लोकसभा चुनाव हुआ था. उस समय गया तीन लोकसभा क्षेत्रों में विभाजित था. गया उत्तर, गया पूर्व और गया पश्चिम. गया पूर्व से कांग्रेस के उम्मीदवार बृजेश्वर प्रसाद ने विजय हासिल की थी. उस समय यहां से सोशलिस्ट पार्टी ने भी उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारा था. गया उत्तर से बिगेश्वर मिस्सिर ने कांग्रेस उम्मीदवार जगन्नाथ प्रसाद सिन्हा को हराया था. गया पश्चिम से कांग्रेस उम्मीदवार सत्येंद्र नारायण सिंह को विजय मिली थी. 

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पहली बार कांग्रेस उम्मीदवार की हुई हार
गया लोकसभा सीट पर 1957 में पहली बार स्वतंत्र रूप से चुनाव हुआ था. उसमें कांग्रेस उम्मीदवार बृजेश्वर प्रसाद को विजय मिली थी. बृजेश्वर प्रसाद को जहां  57927 वोट मिले थे वहीं प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार रामेश्वर प्रसाद जाधव को 24658 वोट से संतोष करना पड़ा था. लोकसभा चुनाव 1962 में भी कांग्रेस का दबदबा कायम रहा. बृजेश्वर प्रसाद यादव ने स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार बृजकिशोर पीडी सिंह मात दी थी.

लोकसभा चुनाव 1967 में भी कांग्रेस को जीत मिली. इस बार कांग्रेस ने आर दास पर भरोसा जताया था. दास ने सम्युक्त सोशलिस्ट पार्टी के एस प्रसाद को हराया था. लोकसभा चुनाव 1971 गया सीट से पहली बार कांग्रेस को हार का समाना करना पड़ा था. अखिल भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार ईश्वर चौधरी ने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश कुमार को मात दी थी.लोकसभा चुनाव 1977 में भी जनता पार्टी के उम्मीदवार ईश्वर चौधरी को जीत मिली थी. 

1984 के बाद कांग्रेस का 'पंजा' नहीं आया
लोकसभा चुनाव 1980 में एक बार फिर कांग्रेस की वापसी हुई. कांग्रेस उम्मीदवार राम स्वरूप राम ने जनता पार्टी में शामिल हो चुके ईश्वर चौधरी को 33927 वोटों के अंतर से हराया था. इसके बाद 1984 में भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की. राम स्वरूम राम को जनता ने फिर अपना सांसद चुना. हालांकि 1984 के बाद कांग्रेस को गया लोकसभा सीट से जीत नसीब नहीं हुई यानी इसके बाद से यहां 'पंजा' नहीं आया.

लोकसभा चुनाव 1989 में जनता दल उम्मीदवार ईश्वर चौधरी ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उम्मीदवार जानकी पासवान को हराया था. 1991 में जनता दल के प्रत्याशी राजेश कुमार ने कांग्रेस उम्मीदवार जीतन राम मंझी को मात दी थी. राजेश कुमार को कुल 308077 वोट तो वहीं मांझी 254282 मत मिले थे. 

1998 में खिला कमल
लोकसभा चुनाव 1996 में भी जनता दल को जीत नसीब हुई. जनता दल की उम्मीदवार भगवती देवी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कृष्ण कुमार चौधरी को मात दी थी. इसके बाद पहली बार गया लोकसभा सीट से 1998 में कमल खिला. बीजेपी के उम्मीदवार कृष्ण कुमार चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल उम्मीदवार भगवती देवी को हराया था. कृष्ण कुमार चौधरी को कुल 303225 वोट तो वहीं भगवती देवी को 265779 मतों से संतोष करना पड़ा. 1999 में फिर से बीजेपी ने गया सीट विजय हासिल की. बीजेपी उम्मीदवार रामजी मांझी ने राष्ट्रीय जनता दल उम्मीदवार राजेश कुमार को 20 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से मात दी थी.

2004 आरजेडी ने मारी बाजी 
लोकसभा चुनाव 2004 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने बाजी मारी. आरजेडी उम्मीदवार राजेश कुमार मांझी ने बीजेपी प्रत्याशी बलबीर चंद को मात दी थी. राजेश मांझी ने जहां 464822 वोट अपने नाम किए तो वहीं बलबीर चंद को 361873 मतों से संतोष करना पड़ा. इसके बाद लोकसभा चुनाव 2009 में हरि मांझी ने बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की थी.

2014 में कैसा रहा जनादेश
लोकसभा चुनाव 2014 में गया सीट से बीजेपी उम्मीदवार हरी मांझी ने एक बार फिर सफलता हासिल की. हरी मांझी को कुल 3,26,230 मत मिले थे. दूसरे नंबर पर रहे आरजेडी प्रत्याशी रामजी मांझी को 2,10,726 वोट, जदयू के टिकट पर मैदान में उतरे जीतन राम मांझी तीसरे नंबर पर रहे थे. जीतन राम मांझी को 1,31,828 वोट मिले थे. चौथे नंबर पर जेएमएम के अशोक कुमार रहे, जिन्हें 36,863 वोट मिले थे. 

विजय मांझी हैं अभी सांसद
लोकसभा चुनाव 2019 में गया सीट से जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार विजय मांझी ने विजय हासिल की थी. विजय कुमार को 467,007 वोट मिले थे. हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के जीतन राम मांझी 314,581 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे. 30,030 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया था. अंबेडकरवादी पार्टी ऑफ इंडिया के शिव शंकर को 20,464 वोट मिले थे और वह चौथे नंबर पर रहे थे.2019 लोकसभा चुनाव में गया सीट से कुल 13 उम्मीदवार चुनाव लड़े थे. कुल 56 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी.

कब और किसने दर्ज की जीत
1957: ब्रजेश्वर प्रसाद, कांग्रेस
1962: ब्रजेश्वर प्रसाद, कांग्रेस
1967: राम धनी दास, कांग्रेस
1971: ईश्वर चौधरी, भारतीय जनसंघ
1977: ईश्वर चौधरी, जनता पार्टी
1980: राम स्वरूप राम, कांग्रेस
1984: राम स्वरूप राम,  कांग्रेस
1989: ईश्वर चौधरी, जनता दल
1991: राजेश कुमार, जनता दल
1996: भगवती देवी, जनता दल
1998: कृष्ण कुमार चौधरी, बीजेपी
1999: रामजी मांझी, बीजेपी
2004: राजेश कुमार मांझी, आरजेडी
2009: हरि मांझी, बीजेपी
2014: हरि मांझी, बीजेपी
2019: विजय कुमार मांझी, जदयू

कुल इतनी हैं विधानसभा सीटें
गया जिले में कुल 10 विधानसभा क्षेत्र हैं. इनमें से छह विधानसभा ही गया लोकसभा क्षेत्र में आता है. 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में तीन सीट पर आरजेडी ने जीत दर्ज की थी. दो विधानसभा सीट पर बीजेपी और एक पर हम के उम्मीदवार ने विजय हासिल की थी. पिछले चुनाव में बोधगया, शेरघाटी और बेलागंज विधानसभा पर आरजेडी ने कब्जा जमाया था. गया टाउन और वजीरगंज पर बीजेपी एवं बाराचट्टी में हम की जीत हुई थी.

जाति फैक्टर करता है काम
गया जिले की 88 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्म को मानती है. 11 प्रतिशत आबादी इस्लाम धर्म में भरोसा करती है. गया लोकसभा सीट 1967 से ही सुरक्षित है. इस सीट पर धर्म के नाम पर गोलबंदी तो नहीं होती लेकिन जाति फैक्टर हार-जीत तय करता है. 1999 से गया लोकसभा सीट से मांझी समाज से ही सांसद बनते आए हैं. इसकी वजह यह है कि गया लोकसभा में इस जाति के लोग ढाई लाख से ज्यादा हैं. इसके अलावा पासवान, धोबी, पासी भी बड़ी संख्या में हैं.

यहां मुस्लिम मतदाता लगभग 2 लाख हैं. भूमिहार और राजपूत मतदाताओं को मिला दें तो ढाई लाख वोटर्स होंगे. यादव 2 लाख से अधिक और वैश्य समाज के भी 2 लाख वोटर्स हैं. लोकसभा चुनाव 2024 में 18 लाख 13 हजार 183 मतदाता उम्मीदवारों की हार-जीत का फैसला करेंगे. मतदाताओं में 9 लाख 42 हजार 188 पुरुष, 8 लाख 70 हजार 974 महिलाएं और 21 अन्य हैं. शेरघाटी विधानसभा में 281606 वोटर, बाराचट्टी में 315599, बोधगया में 325894, गया टाउन में 278251, बेलागंज में 287138, और वजीरगंज विधानसभा क्षेत्र में 324695 मतदाता हैं.