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राज्यसभा चुनाव में बीजेपी जीत लेगी 8 सीटें या अखिलेश यादव तीसरी सीट के लिए लगाएंगे दम?

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर को होना है. संख्याबल के हिसाब से बीजेपी की 7 सीटों पर जीत तय मानी जा रही है. जबकि समाजवादी पार्टी की जीत 2 सीटों पर तय है. एक सीट के लिए खींचतान हो सकती है. उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर को होना है. संख्याबल के हिसाब से बीजेपी की 7 सीटों पर जीत तय मानी जा रही है. जबकि समाजवादी पार्टी की जीत 2 सीटों पर तय है. एक सीट के लिए खींचतान हो सकती है.

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Akhilesh Yadav and Yogi Adityanath Akhilesh Yadav and Yogi Adityanath

16 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव की वोटिंग होनी है. लेकिन इस चुनाव में एक सीट को लेकर आखिरी वक्त में समाजवादी पार्टी और बीजेपी में रस्साकशी हो सकती है. 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी 10 सीटों पर चुनाव हुए थे. तब समाजवादी पार्टी तीन सीटें लगभग जीत रही थी. लेकिन तब बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के ही पुराने चेहरे और उनके कोषाध्यक्ष संजय सेठ को मैदान में उतारा और बड़े स्तर पर क्रॉस वोटिंग के जरिए संजय सेठ की सीट बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के मुंह से छीन ली. तब अखिलेश यादव के उम्मीदवार और पूर्व प्रमुख सचिव आलोक रंजन चुनाव हार गए. लेकिन इस बार का समीकरण कुछ अलग है. बसपा की एक सीट रामजी गौतम की राज्यसभा से खत्म हो रही है और समाजवादी पार्टी दो सीट बड़े आराम से जीतने वाली है, लेकिन सवाल यह है कि क्या तीसरी सीट के लिए समाजवादी पार्टी  आवश्यक संख्या जुटा पाएगी? 

एक सीट के लिए कितने विधायकों की जरूरत-
दरअसल एक सीट पर जीत के लिए 37.9 विधायकों का प्रथम वरीयता वोट चाहिए, अखिलेश यादव के पास 21 वोट सरप्लस है. अपने तीसरे उम्मीदवार के लिए ऐसे में उन्हें 16 से17 विधायकों के वोट की जरूरत होगी. फिलहाल समाजवादी पार्टी के भीतर तीसरे सीट पर दावेदारी को लेकर मंथन चल रहा है.

7 विधायकों ने की थी बगावत-
पिछले चुनाव में सात विधायकों ने सपा से बगावत करके क्रॉस वोटिंग किया था. जिससे भाजपा एक सीट जीत गई थी. इस बार समाजवादी पार्टी से क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश नहीं के बराबर है, जबकि नजरे अब बीजेपी और उनके सहयोगी दलों पर होगी. 

सपा के संपर्क में एसबीएसपी के विधायक?
बताया जाता है कि ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के कई विधायक समाजवादी पार्टी से संपर्क में पहले से हैं और 2027 के चुनाव में सपा से टिकट चाहते हैं. ऐसे विधायक 27 के टिकट के लिए समाजवादी पार्टी के लिए क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं. नजरें आरएलडी के मुस्लिम विधायकों पर भी होगी जो पुराने समाजवादी रहे हैं. इसके अलावा कई और ऐसे चेहरे हैं, जिनको लेकर संशय बना हुआ है. क्या पल्लवी पटेल इस बार समाजवादी पार्टी को मदद करेगी? क्या महाराजजी देवी जो गायत्री प्रजापति की पत्नी हैं, क्या समाजवादी पार्टी को वोट करेंगी? अगर समाजवादी पार्टी गंभीरता से तीसरी सीट को लेगी तो लड़ाई घमासान हो सकती है, अन्यथा बीजेपी आसानी से आठवीं सीट जीत जाएगी.

सपा के पास सिर्फ 97 विधायक-
दरअसल विधानसभा की कुल संख्या 403 की बजाय 397 है, लेकिन समाजवादी पार्टी, जिसके पास कभी 106 विधायक थे. वर्तमान में उनके पास 97 विधायक हैं, क्योंकि लगभग आधा दर्जन से ज्यादा विधायक पाला बदल चुके हैं. क्रॉस वोटिंग कर भाजपा के साथ जा चुके हैं. ऐसे में समाजवादी पार्टी को जीतने के लिए बीजेपी के सहयोगी दलों में सेंध लगाने की जरूरत पड़ेगी. यही नहीं, बीजेपी में भी जो असहज हैं या फिर अपने क्षेत्र के चुनावी समीकरणों को देखते हुए समाजवादी पार्टी जाना चाहते हैं. सपा ऐसे लोगों को राज्यसभा चुनाव में अपने वोटिंग के लिए आजमा सकती है.

बीजेपी के लिए क्या है मुश्किल?
बीजेपी के लिए थोड़ी मुश्किल इसलिए है, क्योंकि पिछले 1 सालों में जिन चार विधायकों का निधन हुआ. उसमें से तीन ने पिछले बार बीजेपी को ही वोट किया था, दो भाजपा विधायक और एक बसपा के विधायक के निधन से बीजेपी का 3 वोट पहले ही कम हो चुका है. जबकि समाजवादी पार्टी के एक विधायक की मृत्यु से उनका एक वोट कम है, दूसरी तरफ अब्बास अंसारी पिछली बार जेल में बंद थे. इस बार जेल से बाहर हैं तो समाजवादी पार्टी को इसका फायदा हो सकता है.

लेकिन कहते हैं सरकार सरकार होती है. ऐसी स्थिति में बीजेपी या उसके गठबंधन से बाहर जाकर क्रॉस वोटिंग करना आसान नहीं है, इसलिए यह तय माना जा रहा है कि बीजेपी आसानी से 10 में से 8 सीटें जीत जाएगी और समाजवादी पार्टी दो सीट जीतेगी.

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