Narottam Mishra (Photo: X/@drnarottammisra)
Narottam Mishra (Photo: X/@drnarottammisra)
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल जारी है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ऐन वक्त पर बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया. यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि राजेंद्र भारती की विधायकी जाने के बाद से नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया में सक्रिय थे और दावेदारी को लेकर इतने निश्चिंत थे कि नामांकन फॉर्म तक ले डाला था. नरोत्तम मिश्रा को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट नहीं दिए जाने के विरोध में उनके समर्थकों का जमकर विरोध प्रदर्शन जारी है. आइए जानते हैं भारतीय जनता पार्टी के नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने के फैसले के पीछे सत्ता संतुलन, फीडबैक और नए पावर सेंटर की पूरी कहानी. आपको मालूम हो कि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने से दतिया सीट रिक्त हुई है. इस सीट के लिए 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त 2026 को मतगणना होगी.
क्यो कटा डॉ.नरोत्तम मिश्रा नाम
बताया जा रहा है कि दिल्ली स्तर पर कराए गए सर्वे में डॉ.नरोत्तम मिश्रा की स्थिति उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं पाई गई. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व ने केवल उम्मीदवार की लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन और भविष्य की राजनीतिक स्वीकार्यता का भी आकलन कराया और आशुतोष तिवारी को टिकट दिया गया.
नया पावर सेंटर बनने से बचना चाहती थी बीजेपी
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, टिकट बदलने के पीछे केवल चुनावी गणित नहीं बल्कि सत्ता संतुलन भी बड़ी वजह हो सकता है. डॉ. नरोत्तम मिश्रा यदि उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचते तो उनके मंत्री बनने और महत्वपूर्ण विभाग मिलने की संभावनाएं थी. जाहिर है कि इससे बीजेपी और सरकार में एक नया शक्ति केंद्र बनता. एमपी बीजेपी में पहले से सीएम मोहन यादव के अलावा शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर जैसे कई शक्ति केंद्र है. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान किसी नए शक्ति केंद्र के बनने से बच रहा था और इसी रणनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए आशुतोष तिवारी को टिकट दिया जो संभागीय संगठन प्रभारी रह चुके हैं. बीजेपी ने एक ब्राह्मण नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर दूसरे ब्राह्मण आशुतोष तिवारी को टिकट दिया है. इससे जातिगत और सामाजिक संतुलन यथावत है.
2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार गए थे नरोत्तम मिश्रा
नरोत्तम मिश्रा का जन्म 15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में हुआ. उनका पैतृक घर डबरा में है. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बीजेपी युवा मोर्चा से की थी. वर्ष 2008 के परिसीमन में डबरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद उन्होंने दतिया विधानसभा का रुख किया. बीजेपी के टिकट पर 2008, 2013 और 2018 में लगातार चुनाव जीते और शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृह मंत्री समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली. हालांकि 2023 का विधानसभा चुनाव उनकी राजनीति का सबसे बड़ा झटका साबित हुआ. तत्कालीन गृह मंत्री रहते हुए वे कांग्रेस के राजेंद्र भारती से चुनाव हार गए.
इसके बाद राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने से दतिया सीट खाली हुई और उपचुनाव की नौबत आई. राजनीतिक गलियारों में लंबे समय तक यही चर्चा रही कि बीजेपी एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा पर दांव लगाएगी. पार्टी के भीतर भी उनका नाम प्रमुख दावेदार माना जा रहा था. लेकिन उम्मीदवारों की सूची जारी हुई तो तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी. दतिया का उपचुनाव अब सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं है. यह चुनाव इस बात की भी परीक्षा है कि क्या बीजेपी का नया प्रयोग सफल होगा? क्या नरोत्तम मिश्रा अपने समर्थकों के साथ पूरी ताकत से पार्टी के लिए प्रचार करेंगे और क्या ग्वालियर-चंबल की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हो चुका है. इन सभी सवालों के जवाब अब 30 जुलाई के मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों में मिलेंगे.