Akka review Hindi
Akka review Hindi
अभी-अभी 'अक्का' देखी और भाई साहब, क्या माइंड-ब्लोइंग सीरीज है. सिर्फ 5 एपिसोड हैं और पूरे पैसे वसूल. मतलब, नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन का पैसा इस सीरीज को देखकर भी वसूल किया जा सकते है. पहले 'अल्फा' और अब 'अक्का'. ऐसा लग रहा है कि बॉलीवुड महिलाओं के लिए रोमांस और साइड कैरेक्टर में दिखाने के अलावा उनकी ताकत को दिखाने के लिए कुछ नया और शानदार लेकर आ रहा है. महिलाओं को सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि मुख्य किरदार के तौर पर दिखाया जा रहा है. सबसे अच्छी बात यह है कि कहीं भी उनके किरदार कमजोर नहीं लगते. महिलाएं एक्शन कर रही हैं, लड़ रही हैं, अपने फैसले ले रही हैं और कहीं भी ऐसा महसूस नहीं होता कि उन्हें सिर्फ एक्शन दिखाने के लिए लड़वाया जा रहा है. उनके किरदारों में एक अलग ही ताकत है.
राधिका, यू आर अमेजिंग! और कीर्ति सुरेश... उनके चेहरे की मासूमियत और अपने राज को अंदर ही अंदर संभालकर रखने की ताकत, जिस खूबसूरती से उनके किरदार में ये दोनों चीजें दिखाई गई हैं, वह वाकई कमाल है. हर एपिसोड खत्म होने के बाद बस यही मन करता था कि अगला एपिसोड लगा दो. और जब पता चला कि पूरी सीरीज में सिर्फ 5 एपिसोड हैं, तो लगा कि भाई, इतनी जल्दी क्यों खत्म कर दिया?
मातृसत्ता को बनाए रखने की कहानी
सीरीज की शुरुआत में बताया जाता है कि अरब सागर और पश्चिमी घाटों के बीच पेरनुरु नाम का एक खूबसूरत राज्य बसा था, जहां सदियों से शांति और खुशहाली थी. लेकिन फिर डेक्कन में एक महायुद्ध हुआ, जिसने पेरनुरु के राजा और उनके सभी काबिल योद्धाओं को जंग में उतरने पर मजबूर कर दिया. इस युद्ध के बाद राजा और उनके योद्धा कभी वापस नहीं लौटे. धीरे-धीरे पेरनुरु कमजोर होने लगा.
ऐसे मुश्किल समय में राजा की बहनों ने राज्य की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद राज्य की महिलाओं ने ही पुरुषों का सारा बिजनेस अपने हाथों में ले लिया. उन्होंने पेरनुरु की रक्षा के लिए युद्ध कलाएं भी सीखीं. यहां की महिलाएं देवी रक्तुर्थी को बहुत मानती हैं. राज्य की स्थापना से लेकर अलग-अलग समुदायों की महिलाओं का जुड़ाव भी देवी रक्तुर्थी से दिखाया गया है. यह कहानी बहनों के बीच एकता और महिलाओं की सामूहिक ताकत को भी सामने रखती है.
पेरनुरु को तीन हिस्सों में बांटा गया है. एक बहन मलेमर की जिम्मेदारी संभालती है, दूसरी हेरकाडा की और तीसरी पेरप्लाडी की. यहीं से मातृसत्ता की शुरुआत होती है. इन तीनों राज्यों की जो बेटी गद्दी पर बैठती है, उसे 'अक्का' कहा जाता है. लेकिन आगे चलकर इसी अक्का की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगता है.
सीरीज में पेरनुरु की मातृसत्ता का इतिहास करीब 800 साल पुराना बताया गया है, लेकिन कहानी को आजादी के आसपास के दौर में रखा गया है. उस समय भारत राजतंत्र से लोकतंत्र की ओर बढ़ चुका था. अक्का ने सरकार को पेरनुरु अधिकार की अनुमति तो दे दी, लेकिन मातृसत्ता से समझौता नहीं किया. यहां की बहनों का मुख्य कारोबार शराब और सोने की अवैध खरीद-बिक्री और भी कई चीजों का है. इसी सत्ता, कारोबार और बदले की कहानी में आगे कई मोड़ आते हैं.
कीर्ति सुरेश यानी भवानी का मासूमियत के साथ रिवॉल्वर रानी वाला अंदाज
कीर्ति सुरेश का किरदार भवानी है. उनके चेहरे पर एक अलग तरह की मासूमियत नेचुरली दिखाई देती है, लेकिन उनके किरदार के भीतर छिपी ताकत कहानी में कई बार सामने आती है. आपने सोशल मीडिया पर कीर्ति के चलने का वह वीडियो जरूर देखा होगा, जिसमें वह कमर पर पिस्टल लटकाकर पूरे रौब के साथ चलती नजर आती हैं. उनका यह अंदाज रिवॉल्वर रानी से कम नहीं लगता.
कीर्ति ने भवानी के किरदार में मासूमियत और दबंगई का ऐसा मेल दिखाया है, जो कहानी में दिलचस्प बनाए रखती है. उनका एक्शन हो, रोमांस हो या फिर कहानी के दूसरे पहलू, हर जगह उनका अंदाज अलग नजर आता है. यही वजह है कि भवानी का किरदार सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कहानी में अपनी अलग पहचान बनाता है.
राधिका आप्टे बनी कहानी की रुद्रा
राधिका आप्टे रुद्रा के किरदार में नजर आती हैं. रुद्रा मुंबई से आई हैं. उनके अभिनय की सबसे खास बात उनका आत्मविश्वास और किरदार को निभाने का अंदाज है. वह पर्दे पर आती हैं तो कहानी का माहौल बदलता हुआ महसूस होता है. उनके हाव-भाव, बोलने का तरीका और चेहरे के भाव किरदार को प्रभावशाली बनाते हैं. राधिका का किरदार सिर्फ अक्का की सत्ता के सामने खड़ी एक चुनौती नहीं है, बल्कि उनके अतीत का एक ऐसा पहलू से भी जुड़ा है, जो पेरनुरु का इतिहास लिखने जा रहा था. इस किरदार की परतें कहानी को और दिलचस्प बनाती हैं.
कीर्ति और राधिका के बीच विचारों की टक्कर
भवानी और रुद्रा के बीच सिर्फ किरदारों की टक्कर नहीं है, बल्कि उनके विचार भी एक-दूसरे से टकराते हैं. दोनों का अपना नजरिया और अपनी ताकत है. एक तरफ अक्का की सत्ता है, तो दूसरी तरफ राधिका आप्टे का किरदार रुद्रा है. इन सबके बीच ये कहानी रहस्यों के साथ आगे बढ़ती है.
कहानी में एक के बाद एक आने वाले ट्विस्ट दर्शकों को बांधे रखते हैं. कई जगह आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आगे क्या होने वाला है, लेकिन उसके बाद भी कहानी को जिस तरह पेश किया गया है, वह बोर नहीं होने देती. पांच एपिसोड की इस सीरीज में कहीं ऐसा नहीं लगता कि कहानी को बेवजह खींचा जा रहा है. ये पूरी सीरीज बदले, और रुद्रा के द्वारा सत्ता हथियाने के आस-पास घूमती है, जो मर्दों को हथियार बनाकर आगे बढ़ रही है.
अभिनय से लेकर एक्शन तक, हर चीज है दमदार
'अक्का' देखते हुए एक बात साफ महसूस होती है कि महिला मुख्य किरदारों के दम पर भी शानदार एक्शन सीरीज बनाई जा सकती है. इसमें एक्शन की कोई कमी नहीं है. साथ ही किरदार और कहानी लेखन या संपादन के स्तर पर कमजोर नजर नहीं आते. एक्शन, इमोशन, रिश्तों की उलझन और बदले की कहानी को अच्छी पेश कर सकती हैं. इस सीरीज के लेखक और निर्देशक धर्मराज शेट्टी हैं. इसके हिंदी संवाद हुसैन दलाल और अब्बास दलाल ने लिखे हैं.
'अक्का' ऐसी सीरीज है जिसे देखते हुए आप अगले एपिसोड का इंतजार करते रहेंगे. कुछ ट्विस्ट का अंदाजा जरूर लग सकता है, लेकिन उन्हें पेश करने का तरीका कहानी में दिलचस्पी बनाए रखता है. इसे देखकर लगता है कि भारत में महिला मुख्य किरदारों पर आधारित कहानियों का भविष्य काफी अच्छा हो सकता है. अगर आपने अभी तक इसे नहीं देखा है, तो नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम कर सकते हैं.
एक बात जो इस पूरी कहानी से निकलकर आती है, वह यह है कि धोखे की कोई माफी नहीं होती. चाहे धोखा देने वाला आपका अपना प्यार ही क्यों न हो. इस सीरीज की सबसे खूबसूरत बात यही है कि एक्शन, इमोशन, बदला और रिश्तों की उलझन, सब कुछ एक ही पैकेज में इतनी खूबसूरती से परोसा गया है. मतलब, अभी तक नहीं देखी? तो भाई, किसका इंतजार कर रहे हो? यह सीरीज समय बर्बाद करने वाली नहीं है.
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