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Filmy Friday Moushumi Chatterjee: एक्ट्रेस जिसे फिल्मों में रोने की एक्टिंग करने के लिए नहीं पड़ती थी ग्लिसरीन की जरूरत...10वीं क्लास में पढ़ते हुए हो गई थी शादी

महज 10वीं क्लास में मौसमी के घरवालों ने उनकी शादी तय कर दी थी. मौसमी ने 16 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत बांग्ला फ़िल्म 'बालिका बधु' से की थी. उनकी पहली हिंदी फिल्म 1972 में आई फिल्म अनुराग थी.

Moushumi chatterjee Moushumi chatterjee

70 और 80 के दशक की मशहूर अभिनेत्री मौसम चटर्जी (Moushmi Chatterjee) को अपनी मनमोहक अदाओं और मुस्कुराहट के लिए जाना जाता है. मौसमी को मंजिल,अनुराग,रोटी कपड़ा और मकान,प्यासा सावन,घर एक मंदिर जैसी कई शानदार फिल्मों के लिए जाना जाता है.लेकिन बहुत कम लोग जनते हैं कि मौसमी ने अपना एक्टिंग करियर शादी के बाद शुरू किया था. महज 16 साल में उन्होंने बांग्ला फिल्म ‘बालिका बधु’ से डेब्यू किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

16 साल की उम्र में शादी
मौसमी चटर्जी का जन्म 26 अप्रैल, 1948 को कोलकाता में हुआ था. मौसमी का असली नाम इंदिरा चटर्जी है.गाली फिल्म के डायरेक्टर तरुण मजूमदार ने उनका नाम बदलकर मौसमी कर दिया था.मौसमी बंगाली परिवार से नाता रखती हैं. उनके पिता इंडियन आर्मी में सेवारत थे और दादा जज थे.मौसमी जब 10वीं क्लास में थीं तभी उनकी शादी हो गई थी. शादी के बाद उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में अपनी पहचान बनाई. महज 16 साल की उम्र में हेमंत कुमार के बेटे जयंत मुखर्जी से उनकी शादी हो गई. इस शादी से मौसमी को दो बेटियां भी हुईं. मौसमी महज 18 साल की थीं और उनपर दो बेटियों की जिम्मेदारी थी. 

फिल्मों में कैसे आईं
मौसमी ने 16 साल की उम्र में बांग्ला फ़िल्म 'बालिका बधु' से अपने करियर की शुरुआत की. उनकी पहली हिंदी फिल्म 1972 में आई फिल्म अनुराग थी.अपने फिल्मी करियर में मौसमी ने खई बेहतरीन फिल्में कीं और राजेश खन्ना, शशि कपूर, जीतेंद्र, संजीव कुमार, विनोद मेहरा और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े-बड़े एक्टर्स के साथ काम किया. 

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रोने के लिए नहीं चाहिए होती थी ग्लिसरीन
मौसमी चटर्जी के बारे में कहा जाता है कि वो इतनी शानदार एक्ट्रेस थी कि उन्होंने कभी भी इमोश्नल सीन के लिए ग्लिसरीन आदि का इस्तेमाल नहीं किया.इस बात को उन्होंने एक इंटरव्यू में भी कबूल किया था. मौसमी चटर्जी ने कहा था,‘ये सच है कि मैं रोने के सीन में ग्लिसरीन का इस्तेमाल नहीं करती हूं.ये ऊपरवाले का दिया वरदान है.मुझे जब रोने का सीन फिल्माना होता था तो मैं सोचती थी कि ये सच में मेरे साथ हो रहा है और मुझे रोना आ जाता था.’

ब्रेक के बाद किया बेहतरीन कमबैक
मौसमी ने फिल्मों से कुछ सालों का ब्रेक लिया और फिर दोबारा फिल्मों में वापसी की.ये कमबैक उनके फिल्मी सफर के लिए काफी अच्छा साबित हुआ. वापसी के बाद मौसमी ने फिल्म आवाज,घायल,ना तुम जानों न हम,पीकू और आ अब लौट चलें जैसी फिल्मों में काम किया. इन फिल्मों में मौसमी के अभिनय की खूब तारीफ हुई.फिल्म 'अनुराग' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड भी मिला.साल 2016 में उन्हें बीएफजेए लाइफटाइम अवॉर्ड से भी नवाजा गया.

इतना ही नहीं,अपनी एक्टिंग करियर के बाद मौसमी ने राजनीति में भी अपना हाथ आजमाया.साल 2004 में वो कांग्रेस में शामिल हो गईं.हालांकि ये उन्हें रास नहीं आया और फिर साल 2019 में कांग्रेस को अलविदा कहकर वो बीजेपी में शामिल हो गईं.