Team of Doctors with the Families of Children Following Advanced Bronchoscopy
Team of Doctors with the Families of Children Following Advanced Bronchoscopy
अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल समय रहते किए गए इलाज की वजह से बड़ी मेडिकल कामयाबी हासिल की है. मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. राकेश जोशी के नेतृत्व में पीडियाट्रिक्स, पीडियाट्रिक सर्जरी और एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की टीम ने सिर्फ पांच दिनों में दो मासूम बच्चों की सफल ब्रोंकोस्कोपी की है, जिनकी सांस की नली में सुपारी और सिंग का दाना फंसने की वजह से हालत क्रिटिकल थी.
छोटे बच्चे अक्सर खेलते समय मूंगफली, सुपारी, सिक्के या दूसरी कोई छोटी चीजें मुंह में डाल लेते हैं. यदि ऐसी कोई चीज सांस की नली में चली जाए और सांस की नली में फंस जाए, तो बच्चे को अचानक तेज खांसी, सांस लेने में बहुत दिक्कत और ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. ऐसे में अगर समय पर सही इलाज न किया जाए, तो यह हालत जानलेवा भी हो सकती है. पिछले 5 दिनों में अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल में ऐसे दो सीरियस मामलों में सफलतापूर्वक इलाज किया गया है.
क्या था पहला मामला
पहले मामले में, विसनगर तालुका के बेचारपुरा गांव के विजय ठाकोर और आशा ठाकोर की 18 महीने की बेटी रियाबेन ठाकोर ने 1 जुलाई को खेलते समय सुपारी का एक टुकड़ा निगल लिया. इसके बाद उसे तेज खांसी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी. विसनगर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में CT स्कैन के दौरान पता चला कि सुपारी का एक टुकड़ा दाहिनी सांस की नली में फंसा हुआ है.
बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया था. अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में बच्ची को डॉ. जॉली जी. वैष्णव और डॉ. प्रियंका पटेल की देखरेख में पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट में भर्ती कराया गया. हालत स्थिर होने के बाद, 2 जुलाई को डॉ. राकेश जोशी ने सफल ब्रोंकोस्कोपी की और सांस की नली में फंसी सुपारी के टुकड़े को निकाला. सर्जरी के दौरान डॉ. अदिति धीमर और डॉ. सोनल भलावत ने अहम भूमिका निभाई. ऑपरेशन के बाद लड़की की तुरंत नली निकाली गई और कुछ ही दिनों में जल्दी ठीक होने पर उसे छुट्टी दे दी गई.
क्या था दूसरा मामला
दूसरे मामले में, राजस्थान के रानीवाड़ा में रहने वाले सियाराम मेघवाल और ममता मेघवाल के 8 महीने के बेटे रियान मेघवाल ने 26 जून को खेलते समय एक सिंग का दाना निगल लिया था. इसके बाद उसे खांसी और सांस लेने में बहुत दिक्कत होने लगी. शुरुआत में बच्चे का इलाज रानीवाड़ा के सरकारी अस्पताल और फिर डीसा के एक प्राइवेट अस्पताल में हुआ. CT स्कैन में बच्चे की दाहिनी मुख्य सांस की नली में कुछ संदिग्ध बाहरी चीज होने का पता चला था. प्राइवेट अस्पताल में ब्रोंकोस्कोपी की कोशिश नाकाम होने के बाद, बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ अहमदाबाद सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया.
27 जून 2026 को बच्चे को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में डॉ. अनुया वी. चौहान और डॉ. कृपा पटेल की देखरेख में पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट में भर्ती कराया गया. बच्चे को सांस लेने में बहुत ज़्यादा दिक्कत होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया. उसके बाद आधी रात डॉ. राकेश जोशी ने इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी की और सांस की नली में फंसे सिंग के टूटे हुए टुकड़ों को सफलतापूर्वक निकाल दिया. सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया टीम को डॉ. मिलिंद मेवाड़ा ने लीड किया. इसके बाद, बच्ची को दो दिन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और पूरी तरह ठीक होने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है.
...तो बच सकती है जान
इस बारे में अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि छोटे बच्चों की सांस की नली में कोई चीज फंस जाना बहुत गंभीर और जानलेवा हो सकता है. ऐसे में समय पर सही डायग्नोसिस, तुरंत रेफर और अनुभवी टीम द्वारा की गई ब्रोंकोस्कोपी से बच्चे की कीमती जान बच सकती है. सभी माता-पिता को समझना होगा कि अगर घर में छोटा बच्चा है तो उन्हें मूंगफली, सुपारी, सिक्के, बटन, मोती और छोटे खिलौनों जैसी चीजों से दूर रखें. बच्चा अगर खेल रहा है तो उस समय बच्चों पर लगातार नज़र रखें. अगर आपके बच्चे को अचानक लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलने लगे, तो कोई भी घरेलू इलाज न करें. बिना समय बर्बाद किए, बच्चे को पास के हॉस्पिटल ले जाएं और स्पेशलिस्ट से तुरंत इलाज करवाएं.