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दिल्ली में 300 नई पुलिस चौकियां होंगी स्थापित, सबवे, फ्लाईओवर और फुट ओवरब्रिज पर बढ़ेगी सुरक्षा व्यवस्था...

बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच सरकार ने शहर के विभिन्न हिस्सों में सबवे, फ्लाईओवर और फुट ओवर ब्रिज को अधिक सुरक्षित बनाने की योजना तैयार की है. इस योजना के तहत करीब 300 नई पुलिस चौकियां स्थापित की जाएगी, जिससे आम नागरिकों, खासकर महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सकेगा.

BJP leader Pravesh Verma. (File photo) BJP leader Pravesh Verma. (File photo)

राजधानी दिल्ली में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है. बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच सरकार ने शहर के विभिन्न हिस्सों में सबवे, फ्लाईओवर और फुट ओवर ब्रिज को अधिक सुरक्षित बनाने की योजना तैयार की है. इस योजना के तहत करीब 300 नई पुलिस चौकियां स्थापित की जाएगी, जिससे आम नागरिकों, खासकर महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सकेगा.

सरकार का यह फैसला उन इलाकों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्हें लंबे समय से असुरक्षित माना जाता रहा है. इन स्थानों में सबवे, फ्लाईओवर के नीचे के क्षेत्र और फुट ओवरब्रिज के आसपास के इलाके शामिल हैं, जहां अक्सर असामाजिक गतिविधियां देखने को मिलती हैं.

पहले चरण में इन इलाकों पर रहेगा फोकस
योजना के पहले चरण में शहर के व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी. इनमें AIIMS फ्लाईओवर, धौला कुआं, ITO, रिंग रोड और लाजपत नगर जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं. इसके अलावा भैरों मार्ग, लाला लाजपत राय मार्ग और आंद्र्यूज गंज के आसपास के अंडरपास भी इस अभियान का हिस्सा होंगे.

क्यों असुरक्षित माने जाते हैं ये स्थान
कई सर्वे के अनुसार, 30 प्रतिशत से अधिक लोग सुरक्षा कारणों से सबवे का उपयोग करने से बचते हैं. इसके पीछे कई वजहें हैं जैसे खराब रोशनी, सुनसान माहौल, अतिक्रमण, कचरा और अव्यवस्था. खासतौर पर शाम के समय ये स्थान महिलाओं के लिए अधिक असुरक्षित महसूस होते हैं. इन क्षेत्रों में अक्सर स्ट्रीट लाइट, सेफ्टी बैरियर और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की चोरी या तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आती रही हैं. पुलिस चौकियों की स्थापना से इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी.

पैदल यात्रियों को मिलेंगे ये फायदे
नई व्यवस्था के तहत बीट कांस्टेबलों की नियमित तैनाती की जाएगी और गश्त बढ़ाई जाएगी. साथ ही ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और अन्य गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखी जाएगी. इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग भी आसान और सुरक्षित हो सकेगा.

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