Ghaziabad News
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर एक बार फिर जमीन पर देखने को मिला, जब गांधीनगर क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक समय से कब्जाई गई एक दुकान को प्रशासन ने मुक्त कराकर उसके वास्तविक मालिक बुजुर्ग दंपति को सौंप दिया. कार्रवाई के बाद भावुक दंपति ने जिलाधिकारी की तुलना हनुमान जी से करते हुए कहा कि उन्हें अब तक उम्मीद नहीं थी कि उनकी दुकान उन्हें वापस मिल पाएगी.
बुजुर्ग दंपति को वापस मिली दुकान-
मिली जानकारी के अनुसार बुजुर्ग दंपति ने अपनी दुकान पर लंबे समय से चले आ रहे कब्जे की शिकायत जिलाधिकारी के समक्ष रखी थी. शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच कर दस्तावेजों का परीक्षण कराया. जांच में शिकायत सही पाए जाने पर स्क्रीनिंग कमेटी के निर्णय के आधार पर तत्काल कार्रवाई का फैसला लिया गया.
इसके बाद मंगलवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गांधीनगर पहुंचे. प्रशासन की मौजूदगी में कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई और दुकान को उसके मूल स्वामियों को वापस सौंप दिया गया. इस दौरान दुकान का प्रतीकात्मक रूप से नारियल फोड़कर उद्घाटन भी कराया गया.
22 सालों से था अवैध कब्जा-
बुजुर्ग दंपति ने बताया कि दुकान पर पिछले 22 वर्षों से कब्जा था और कब्जाधारी मोहम्मद इमामुद्दीन मलिक द्वारा दुकान खाली कराने की मांग करने पर उन्हें धमकियां भी दी जाती थीं. उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक प्रयास करने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला और अब उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी. दुकान वापस मिलने के बाद दंपति की आंखें नम हो गईं. उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी उनके लिए हनुमान की तरह आए और वर्षों पुरानी पीड़ा को समाप्त कर दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया.
प्रशासन की इस कार्रवाई को क्षेत्र में चर्चा का विषय माना जा रहा है और लोग इसे लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में एक बड़ी पहल के रूप में देख रहे हैं.
(मयंक गौड़ की रिपोर्ट)
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