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PAK के मंत्री की अजीब सलाह- महंगाई से निपटना है तो कम रोट‍ियां खाएं लोग

पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है. खाद्य वस्तुओं की कीमत आशमान छू रही हैं, जिसकी वजह से लोगों में बेहद नाराजगी है. ऐसे में पाकिस्तान की सरकार लोगों की मुसीबत कम करने की बजाए उस पर नमक छिड़कने का काम कर रही है. पाकिस्तान के संघीय मंत्री अली अमीन गंडापुर ने पाकिस्तान के लोगों को सलाह दी है कि वो चाय में चीनी कम डालें और रोटियां कम खाएं.

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महंगाई से निपटने के लिए दी कम खाने की सलाह महंगाई से निपटने के लिए दी कम खाने की सलाह
हाइलाइट्स
  • कम खाना खाने और कम चीनी इस्तेमाल करने की सलाह

  • सोशल मीडिया पर यूजर्स ने की आलोचना

  • आत्मनिर्भरता के लिए इतनी सी कुर्बानी भी नहीं दे सकते - अली अमीन

पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है. खाद्य वस्तुओं की कीमत आसमान छू रही हैं, जिसकी वजह से लोगों में बेहद नाराजगी है. ऐसे में पाकिस्तान की सरकार लोगों की मुसीबत कम करने की बजाए उस पर नमक छिड़कने का काम कर रही है. पाकिस्तान के संघीय मंत्री अली अमीन गंडापुर ने पाकिस्तान के लोगों को सलाह दी है कि वो चाय में चीनी कम डालें और रोटियां कम खाएं. 

मंत्री ने दी कम खाने की सलाह
अली ने यह बयान पाक कब्जे वाले कश्मीर में एक सभा को संबोधित करते हुए दिया. इस दौरान उन्होंने महंगाई पर होने वाली बहस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर मैं चाय में चीनी के सौ दाने डालता हूं और नौ दाने कम डालूं, तो क्या वह कम मीठी हो जाएगी? उन्होंने कहा, क्या हम अपने देश के लिए, अपनी आत्मनिर्भरता के लिए इतनी सी कुर्बानी भी नहीं दे सकते? अगर मैं रोटी के सौ निवाले खाता हूं तो उसमें नौ निवाले कम नहीं कर सकता हूं?"

सोशल मीडिया पर हुई निंदा
सोशल मीडिया पर यूजर्स हर तरफ उनके इस बयान की कड़ी आलोचना कर रहे हैं. हाल ही में इमरान खान की पार्टी (पीटीआई) के नेशनल असेंबली के सदस्य रियाज फतयाना ने भी ऐसी ही सलाह दी थी. ये लिस्ट यहीं आकर खत्म नहीं होती है. इससे पहले पाकिस्तान मुस्लिम लीग समेत कई पार्टियों के नेता इस तरह की बातें करते रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने भी पाकिस्तान की जनता से कम रोटी खाने की बात कही थी.

नवाज शरीफ ने कहा था सिर्फ एक वक्त खाएं खाना

साल 1998 में जब पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने स्वीकार किया था कि पाकिस्तान को अमेरिका और बाकी दुनिया की तरफ से कठिन आर्थिक पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है. टीवी और रेडियो पर जनता को संबोधित करते हुए, उन्होंने इस बारे में सचेत करते हुए कहा था कि अपनी कमर कस लें और सिर्फ एक वक्त खाना खाने के लिए तैयार हो जाएं और इस परेशानी में मैं भी आपके साथ रहूंगा.