Plastic Warrior
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देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक जहां देश की सुरक्षा में जुटे रहते हैं, वहीं सीमावर्ती इलाकों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. इसी समस्या को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता दीपाली सिन्हा ने एक अनोखी पहल शुरू की है. उन्होंने सीमावर्ती गांवों से लेकर सेना के कैंपों और दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों तक लोगों को प्लास्टिक के नुकसान के बारे में जागरूक करने का अभियान चलाया है.
दीपाली सिन्हा का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि प्लास्टिक का अत्यधिक इस्तेमाल न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है बल्कि इंसानों और जानवरों के लिए भी खतरनाक साबित होता है. उनकी यह मुहिम धीरे-धीरे सीमावर्ती इलाकों में एक जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है. दुर्गम गांवों तक पहुंचकर लोगों को किया जागरूक
दुर्गम गांवों तक पहुंचकर लोगों को किया जागरूक
दीपाली सिन्हा बताती हैं कि सीमावर्ती क्षेत्रों के कई गांव ऐसे हैं जहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल होता है. इसके बावजूद वह पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर इन इलाकों तक पहुंचीं. मुहिम के दौरान वह एक ऐसे गांव में भी गईं जहां आज तक सेना के अलावा कोई बाहरी व्यक्ति नहीं पहुंचा था. इन गांवों में उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने का अभियान चलाया. गांव-गांव जाकर लोगों को समझाया गया कि प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित करता है. लोगों को कपड़े या अन्य पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया.
सेना के कैंपों में भी चलाया जागरूकता अभियान
दीपाली सिन्हा की मुहिम सिर्फ गांवों तक ही सीमित नहीं रही. उन्होंने उन इलाकों तक भी पहुंच बनाई जहां सेना के जवान रहते हैं और अपनी ड्यूटी निभाते हैं. सेना के कैंपों में भी प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने का अभियान चलाया गया और जवानों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में बताया गया. इस पहल के तहत सेना के एक कैंप में प्लास्टिक कचरे को सही तरीके से प्रबंधित करने के लिए बेलिंग मशीन भी लगाई गई है. इस मशीन के जरिए प्लास्टिक को दबाकर पैक किया जाता है, ताकि उसे आसानी से रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जा सके.
स्कूलों में भी फैलाया जागरूकता का संदेश
दीपाली सिन्हा ने दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में भी बच्चों और युवाओं को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया. उनका मानना है कि अगर नई पीढ़ी अभी से पर्यावरण के प्रति जागरूक होगी तो भविष्य में प्लास्टिक प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
रिपोर्टर: मनीष चौरसिया
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