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सिर्फ चीनी नहीं, फलों की कमी भी बन रही है डायबिटीज की बड़ी वजह... नई स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

भारत में टाइप-2 डायबिटीज बढ़ने का एक बड़ा कारण लोगों का कम फल खाना भी है. विशेषज्ञों का कहना है कि फल शरीर को जरूरी पोषक तत्व देते हैं और इन्हें न खाने से डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है.

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अगर आप यह सोचते हैं कि सिर्फ चीनी, मिठाई या जंक फूड खाने से ही डायबिटीज होती है, तो यह खबर आपके लिए है. एक नई स्टडी में सामने आया है कि भारत में टाइप-2 डायबिटीज का सबसे बड़ा खानपान से जुड़ा कारण चीनी नहीं, बल्कि पर्याप्त मात्रा में फल न खाना है. विशेषज्ञों का कहना है कि फलों से दूरी बनाने की आदत लोगों को फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे जरूरी पोषक तत्वों से वंचित कर रही है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है.

यह अध्ययन Diabetes Research and Clinical Nutrition जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसमें Global Burden of Disease Study 2023 के आधार पर एशिया के 34 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में एशिया में खानपान से जुड़े जोखिमों के कारण टाइप-2 डायबिटीज से करीब 2.15 लाख लोगों की मौत हुई, जबकि लगभग 1 करोड़ DALYs यानी बीमारी और समय से पहले मौत का बोझ दर्ज किया गया. अध्ययन में पाया गया कि फलों का कम सेवन सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया. इसकी वजह से अकेले एशिया में करीब 86 हजार मौतें और 36 लाख DALYs दर्ज किए गए.

भारत और दक्षिण एशिया की समस्या चीन, जापान और मध्य एशिया से अलग है. जहां कई देशों में लाल और प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन डायबिटीज का बड़ा कारण है, वहीं भारत में लोग पर्याप्त फल और साबुत अनाज नहीं खा रहे हैं. यही वजह यहां डायबिटीज के बढ़ते मामलों में अहम भूमिका निभा रही है.

भारत में गंभीर है स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज की स्थिति में हैं. ICMR-INDIAB और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अपनी कुल कैलोरी का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा कार्बोहाइड्रेट से लेते हैं. इनमें सफेद चावल और रिफाइंड अनाज की मात्रा अधिक होती है, जबकि फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन का सेवन कम होता है.

फलों से डरना नहीं, सही मात्रा में खाना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग फलों में मौजूद प्राकृतिक मिठास के कारण उन्हें खाने से बचते हैं. जबकि फल फाइबर, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और कई ऐसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं, जो शरीर में ब्लड शुगर को संतुलित रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. वी. मोहन का कहना है कि भारत में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, कम फाइबर और कम प्रोटीन वाला आहार डायबिटीज का बड़ा कारण है. उनके अनुसार, साबुत अनाज, फल और स्वस्थ वसा जैसे मूंगफली, सरसों और ऑलिव ऑयल का सेवन बीमारी के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है.

क्या है विशेषज्ञों की सलाह
शोधकर्ताओं का मानना है कि भारत में डायबिटीज की रोकथाम के लिए केवल चीनी कम करने की सलाह पर्याप्त नहीं है. लोगों को अपने रोजाना के आहार में मौसमी फल, साबुत अनाज, हरी सब्जियां और अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन शामिल करना चाहिए. इससे टाइप-2 डायबिटीज के बढ़ते खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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