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Gorakhpur AIIMS: गोरखपुर एम्स का हेलीपैड बनेगा लाइफलाइन! सारे नॉर्म्स पूरे, इसी सितंबर महीने के अंत तक एयर एंबुलेंस सेवा होगी शुरू

Air Ambulance Service: गोरखपुर एम्स में हेलीपैड का निर्माण अंतिम चरण में है. यहां से इस महीने के अंत तक एयर एंबुलेंस सेवा शुरू होने की उम्मीद है. इससे गंभीर मरीजों के लिए गोल्डन आवर्स में अस्पताल तक पहुंचाना आसान होगा.

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Gorakhpur AIIMS Gorakhpur AIIMS

गोरखपुर एम्स में अब मरीजों को एयर एंबुलेंस की सुविधा मिलने की राह आसान होती दिखाई दे रही है. एम्स में पहले से मौजूद हेलीपैड को एयर एंबुलेंस की जरूरतों के मुताबिक और बेहतर किया जा रहा है. एम्स निदेशक के मुताबिक, हेलीपैड में कुछ जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि एयर एंबुलेंस की सुरक्षित लैंडिंग और मरीजों की तत्काल आवाजाही सुनिश्चित की जा सके. दुर्गम इलाकों में फंसे मरीजों से लेकर आपदा और मास कैजुअल्टी जैसी परिस्थितियों में यह सुविधा बेहद कारगर साबित हो सकती है. खास तौर पर गंभीर मरीजों के लिए गोल्डन आवर्स में अस्पताल तक पहुंचाना आसान होगा.

ओपीडी के बिल्कुल पास है हेलीपैड 
गोरखपुर एम्स की निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि एम्स गोरखपुर में एयर एंबुलेंस की सुविधा को और बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है. एम्स परिसर में बने हेलीपैड को एयर एंबुलेंस की लैंडिंग के लिए और अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है. इसके लिए एयरफोर्स के अधिकारियों से भी सुझाव लिए गए हैं. खास बात यह है कि हेलीपैड ओपीडी के बिल्कुल पास है, जिससे एयर  एंबुलेंस से आने वाले मरीजों को अस्पताल की इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर तक जल्द पहुंचाने में मदद मिलेगी. इस सितंबर महीने के अंत तक एयर एंबुलेंस सेवा शुरू होने की उम्मीद है. 

मरीज जल्द पहुंच जाएंगे अस्पताल
गंभीर मरीजों के इलाज में एक-एक मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में एम्स गोरखपुर की हेली एम्बुलेंस पहल आपदा और गंभीर चिकित्सा आपातकाल की स्थिति में मरीजों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है. खास बात यह है कि इस सुविधा से गोल्डन आवर्स को बचाने और कई जिंदगियां बचाने में मदद मिल सकती है. एम्स गोरखपुर की इस पहल से न सिर्फ गोरखपुर बल्कि आसपास के बड़े क्षेत्र के लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. एयर एंबुलेंस से गंभीर मरीजों को गोरखपुर से लखनऊ करीब 35 से 40 मिनट में और दिल्ली लगभग पौने दो घंटे में पहुंचाया जा सकेगा. अभी गोरखपुर एम्स से गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने पर उन्हें सड़क मार्ग से एंबुलेंस अथवा ट्रेन और विमान के जरिए दूसरे चिकित्सा संस्थानों तक भेजना पड़ता है. इसमें कई घंटे लग जाते हैं.