Somatic Shaking (Photo/AI)
Somatic Shaking (Photo/AI)
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम हो गया है. हर किसी को किसी ना किसी चीज की चिंता है. लेकिन ये स्ट्रेस ज्यादा समय तक रहता है तो इसका असर सेहत पर भी पड़ता है. इसलिए तनाव को दूर रखना जरूरी है. जितनी जल्दी हो सके, स्ट्रेस को खत्म करें. Somatic Shaking नाम की आसान तकनीक से टेंशन और बेचैनी से राहत पा सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि सोमैटिक शेकिंग तकनीक क्या है और इससे कैसे तनाव से राहत मिलती है?
क्या है सोमैटिक शेकिंग?
यह एक नेचुरल और थेरेप्यूटिक तकनीक है, जिसमें पूरे शरीर या कुछ हिस्सों को हिलाया-डुलाया जाता है. इसमें जान बूझकर उछलना या कांपना जैसी एक्टिविटी की जाती है. इससे तनाव कम होता है और आराम मिलता है. इसका मकसद बॉडी और नर्वस सिस्टम में तनाव और चिंता को बाहर निकालना है.
जानवरों से आया था आइडिया-
सोमैटिक शेकिंग का आइडिया जानवरों से आया है. कई बार जानवर किसी खतरे से बचने के बाद शांत होने सेप हले खुद ही कांपते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से बॉडी से तनाव को दूर करने में मदद मिलती है. थेरेपी करने वालों का सुझाव है कि बॉडी की इन हरकतों को दबाने की बजाय उन्हें होने देने से भावनाओं को काबू करने और तनाव से उभरने में मदद मिलती है.
एंग्जायटी में मिलती है मदद-
एंग्जायटी से हमारी शरीर में आगे को लेकर चिंता बढ़ती है. हम बुरा से बुरा सोचने के चक्र में फंस जाते हैं. लेकिन जब हम शेकिंग तकनीक करते हैं तो हमारा फोकस शरीर की हलचल पर होता है, बाकी चीजों को भूल जाते हैं. सोमैटिक शेकिंग मांसपेशियों के तनाव को कम करने में भी मदद कर सकती है.
तनाव से बॉडी पर क्या होता है असर?
जब हम तनाव में होते हैं तो हमारा दिमाग सर्वाइवल सिस्टम को एक्टिव कर देता है. इससे दिल तेजी से धड़कने लगता है. सांसें तेज चलने लगती है. मांसपेशियां स्ट्रेच हो जाती हैं. समय के साथ तनाव सिर्फ चिंता या घबराहट के तौर पर नहीं, बल्कि शारीरिक लक्षणों के रूप में भी महसूस होने लगता है. ऐसे में गर्दन में दर्द, सिरदर्द, बेचैनी, थकान महसूस होने लगता है.
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