Illustration of a T lymphocyte white blood cell (blue) attacking a cancer cell (red). CAR-T therapy is a type of immunotherapy that genetically modifies a patient's own T cells to recognise and destroy cancer cells
Illustration of a T lymphocyte white blood cell (blue) attacking a cancer cell (red). CAR-T therapy is a type of immunotherapy that genetically modifies a patient's own T cells to recognise and destroy cancer cells
जुरासिक पार्ट स्टार सैम नील को बीते रोज निधन हो गया. सैम एक दुर्लभ और तेजी से फैलने वाले ब्लड कैंसर एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिम्फोमा (Angioimmunoblastic T-cell Lymphoma-AITL) से पीड़ित थे. यह बीमारी बेहद कम लोगों में होती है, लेकिन काफी आक्रामक मानी जाती है.
क्या है AITL?
AITL एक दुर्लभ और तेजी से बढ़ने वाला ब्लड कैंसर है. यह शरीर की टी-लिम्फोसाइट्स नाम के वाइट ब्लड सेल्स को प्रभावित करता है. ये कोशिकाएं हमारी इम्यूनिटी का अहम हिस्सा होती हैं और शरीर को वायरस, बैक्टीरिया व अन्य संक्रमणों से बचाने का काम करती हैं. जब इन कोशिकाओं में कैंसर विकसित हो जाता है, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है. यही वजह है कि मरीज को बार-बार संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है. AITL, नॉन-हॉजकिन टी-सेल लिम्फोमा का एक प्रकार है.
क्यों मानी जाती है खतरनाक बीमारी?
यह कैंसर बहुत तेजी से बढ़ता है और शुरुआती दौर में ही शरीर के दूसरे अंगों तक फैल सकता है. यह लिवर, फेफड़ों, बोन मैरो और लिम्फ नोड्स को प्रभावित कर सकता है. इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण या फ्लू जैसे लगते हैं. इसी वजह से कई मरीजों में इसकी पहचान देर से हो पाती है और तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है.
किन लोगों में ज्यादा होता है?
AITL किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन यह बीमारी 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती है. यह एक दुर्लभ कैंसर है, इसलिए इसके मामले बहुत कम सामने आते हैं.
इसके लक्षण क्या हैं?
लगातार बुखार रहना.
रात में अत्यधिक पसीना आना.
बिना वजह तेजी से वजन कम होना.
गर्दन, बगल या जांघ के पास लिम्फ नोड्स में सूजन.
त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली या रैशेज.
सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी.
कमजोरी और लगातार थकान महसूस होना.
यह बीमारी इम्यून सिस्टम पर हमला करती है, इसलिए कुछ मरीजों में ऑटोइम्यून बीमारियां भी विकसित हो सकती हैं. इनमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है.
इसका इलाज कैसे किया जाता है?
AITL का इलाज मरीज की उम्र, बीमारी की स्टेज और उसकी सामान्य स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है. इलाज के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं.
1. कीमोथेरेपी: यह सबसे सामान्य इलाज है, जिसमें दवाओं के जरिए कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की कोशिश की जाती है.
2. इम्यूनोथेरेपी: इसमें ऐसी दवाएं दी जाती हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने में मदद करती हैं.
3. टारगेटेड थेरेपी: यह इलाज कैंसर कोशिकाओं के खास हिस्सों को निशाना बनाता है, जिससे सामान्य कोशिकाओं को कम नुकसान होता है.
4. स्टेम सेल ट्रांसप्लांट: कुछ मरीजों में इलाज के बाद स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया जाता है ताकि स्वस्थ रक्त कोशिकाएं दोबारा बन सकें.
5. CAR-T सेल थेरेपी: जिन मरीजों में बीमारी इलाज के बाद फिर लौट आती है या सामान्य इलाज असर नहीं करता, उनके लिए CAR-T सेल थेरेपी एक नया विकल्प बन रही है.
क्या इस बीमारी से बचाव संभव है?
फिलहाल AITL को पूरी तरह रोकने का कोई तरीका नहीं है. इसके ऐसे जोखिम कारक नहीं मिले हैं जिन्हें बदलकर बीमारी से बचा जा सके. हालांकि, मजबूत इम्यून सिस्टम बनाए रखना हमेशा फायदेमंद माना जाता है. इसके लिए संतुलित आहार लें, पर्याप्त नींद लें, नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें तथा शराब का सेवन सीमित रखें.
इस बीमारी में मरीज कितने समय तक जीवित रह सकते हैं?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार AITL में पांच साल तक जीवित रहने की दर लगभग 30 से 35 प्रतिशत है. यानी इस बीमारी से ग्रस्त 100 मरीजों में से लगभग 30 से 35 मरीज निदान के पांच साल बाद तक जीवित रहते हैं. सात साल की सर्वाइवल रेट करीब 29 प्रतिशत बताई गई है. हालांकि, यह केवल औसत आंकड़े हैं. हर मरीज की उम्र, बीमारी की स्टेज, आनुवंशिक स्थिति और इलाज के प्रति प्रतिक्रिया अलग होती है.
कब डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए?
यदि कई सप्ताह तक लगातार बुखार, बिना वजह वजन कम होना, रात में पसीना आना, लिम्फ नोड्स में सूजन या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.