सहारनपुर में लगा सर्कस
सहारनपुर में लगा सर्कस
सहारनपुर में करीब 10 साल बाद लगे सर्कस ने शहरवासियों को एक बार फिर बचपन की यादों से जोड़ दिया है. आज के दौर में जहां AI, इंटरनेट और यूट्यूब के कारण हर व्यक्ति मोबाइल की स्क्रीन में सिमट गया है, वहीं यह सर्कस पूरे परिवार को एक साथ बैठने का मौका दे रहा है. अफ्रीकन कलाकारों द्वारा जिमनास्टिक और मार्शल आर्ट के करतब, छोटे-छोटे जोकरों की कॉमेडी और आर्टिफिशियल गोरिल्ला व डायनासोर का शो दर्शकों, खासकर बच्चों के चेहरों पर मुस्कान ला रहा है.
आज के समय में फैमिली एंटरटेनमेंट लगभग मोबाइल तक सीमित हो गया है, जहां हर कोई अलग-अलग स्क्रीन पर व्यस्त रहता है. ऐसे माहौल में सर्कस एक ऐसा मंच बनकर उभरा है, जहां पूरा परिवार एक साथ बैठकर हंसता है, तालियां बजाता है और बिना किसी डिजिटल डिस्टर्बेंस के मनोरंजन का आनंद लेता है. यही वजह है कि सर्कस के अंदर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की मौजूदगी दिखाई दे रही है और लोग इसे ‘रियल एंटरटेनमेंट’ बता रहे हैं.
सर्कस मनोरंजन के साथ यादों का हिस्सा
इवेंट मैनेजर संतोष नायर ने बताया कि उन्हें सर्कस चलाते हुए करीब 20 साल हो चुके हैं और मोबाइल व AI के जमाने में भी सर्कस का चलना इस बात का प्रमाण है कि लोगों का रुझान आज भी इससे जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि 1980 और 1990 के दशक में पले-बढ़े लोगों के लिए सर्कस सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि यादों का हिस्सा है. यही कारण है कि वे चाहते हैं कि नई पीढ़ी भी इस अनुभव को जाने और भारतीय संस्कृति के इस रंगीन पहलू से जुड़े.
संतोष नायर ने बताया कि समय के साथ सर्कस को अपग्रेड किया गया है. जानवरों पर प्रतिबंध के बाद अब आर्टिफिशियल डायनासोर और गोरिल्ला बच्चों के आकर्षण का केंद्र हैं. करीब दो घंटे का यह कार्यक्रम पूरी तरह पारिवारिक है, जिसमें भारतीय और विदेशी कलाकार मिलकर मंच सजाते हैं. सहारनपुर में 10 साल बाद आए इस सर्कस को लोगों का जबरदस्त प्यार मिल रहा है और यह साबित कर रहा है कि डिजिटल युग में भी सर्कस आज एक ऐसा माध्यम है, जो पूरे परिवार को एक साथ जोड़ने की ताकत रखता है.