education through the Sumangala Yojana
education through the Sumangala Yojana
आर्थिक तंगी के चलते जिन परिवारों के लिए बेटियों की पढ़ाई और परवरिश मुश्किल हो जाती है, उनके लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना सहारा बन रही है. सरकार की इस योजना के जरिए बेटियों को जन्म से लेकर डिप्लोमा स्तर तक आर्थिक सहायता दी जा रही है. योजना का लाभ पाने वाले परिवारों का कहना है कि सरकार की मदद से उनकी बेटियों की पढ़ाई का सपना आगे बढ़ रहा है और इसके साथ ही जन्म के समय बच्चों के लिए खर्च होने वाले पैसे में भी मदद मिल रही है. वही इस योजना को लेकर लाभार्थी मुख्यमंत्री का धन्यवाद दे रहे है.
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत पात्र बेटियों को अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है. जन्म से लेकर डिप्लोमा तक की पढ़ाई के दौरान सरकार छह किश्तों में कुल 25 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करा रही है. यह राशि बेटियों की दवाई, पढ़ाई और आगे की शिक्षा में परिवारों के लिए मददगार साबित हो रही है. बेटियों के जन्म पर 5 हजार, 1 वर्ष पर 2 हजार, क्लास 1 में प्रवेश पर 3 हजार, 6 क्लास में प्रवेश पर 3 हजार, 9 क्लास में प्रवेश पर 5 हजार और डिप्लोमा करने पर 7 हजार की मदद की जाएगी.
लाभार्थी परिवारों ने जताया आभार
जनपद के अमेठी तहसील क्षेत्र के रायपुर फुलवारी गांव की रहने वाली हसीना ने बीते 1 साल पहले एक बेटी को जन्म दिया. जिसके बाद हसीना ने इस योजना के लिए आवेदन दिया. जिसके बाद मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का लाभ मिला है. परिवार का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बेटियों की पढ़ाई और पालन-पोषण में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता परिवार के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है.
लाभार्थी परिवारों का कहना है कि अगर सरकार की ओर से यह आर्थिक सहायता नहीं मिलती तो बेटियों की पढ़ाई जारी रखना और उनका पालन-पोषण करना मुश्किल हो जाता. परिवारों ने योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए सरकार की जमकर सराहना की है.
भविष्य को लेकर परिवारों को आर्थिक सहयोग
कन्या सुमंगला योजना का उद्देश्य बेटियों के जन्म, स्वास्थ्य, शिक्षा और उनके भविष्य को लेकर परिवारों को आर्थिक सहयोग देना है. योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता से बेटियों को पढ़ाई जारी रखने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर मिल रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना बेटियों की उड़ान में पंख का काम कर रही है.
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