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Bahraich Medical College Incident: बहराइच में अस्पताल की फर्श पर प्रसूता की डिलीवरी, नवजात की मौत, डॉक्टर और 3 नर्सों पर कार्रवाई के आदेश

बहराइच मेडिकल कॉलेज में प्रसूता की अस्पताल की फर्श पर डिलीवरी होने और नवजात की मौत के बाद लापरवाही के आरोप लगे हैं. वीडियो वायरल होने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एक डॉक्टर और तीन स्टाफ नर्सों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं. मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है.

बहराइच मेडिकल कॉलेज बहराइच मेडिकल कॉलेज

बहराइच के महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है. प्रसव के लिए भर्ती एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर डिलीवरी रूम तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया. आरोप है कि स्टाफ नर्स ने भी उसे डिलीवरी रूम तक नहीं पहुंचाया. ऐसे में परिजन प्रसूता को पैदल लेकर जाने लगे. इसी दौरान अस्पताल की फर्श पर ही महिला का प्रसव हो गया. परिजनों का आरोप है कि नवजात फर्श पर गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई.

परिजनों ने स्टाफ पर लगाए गंभीर आरोप
जानकारी के मुताबिक, हरदी थाना क्षेत्र के नेपाल पुरवा गांव की रहने वाली ज्योति को 19 जुलाई 2026 को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. आरोप है कि अगले दिन जब प्रसव पीड़ा तेज हुई तो परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ से स्ट्रेचर मांगा, लेकिन न तो स्ट्रेचर दिया गया और न ही किसी कर्मचारी ने प्रसूता को डिलीवरी रूम तक पहुंचाने की व्यवस्था की. इसके बाद महिला अपने परिजनों के सहारे स्वयं डिलीवरी रूम की ओर जाने लगी और रास्ते में ही अस्पताल की फर्श पर उसकी डिलीवरी हो गई.

वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
घटना के बाद नवजात के पिता अमित शुक्ला ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया. मृत नवजात को हाथ में लेकर उनका रो-रोकर बुरा हाल था. घटना का वीडियो मौके पर मौजूद लोगों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. वीडियो सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया.

प्रिंसिपल ने दिए जांच और कार्रवाई के आदेश
महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय खत्री ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही मानते हुए महिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात एक डॉक्टर और तीन स्टाफ नर्सों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. साथ ही सीएमएस के नेतृत्व में जांच समिति गठित कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

प्रिंसिपल ने क्या कहा?
डॉ. संजय खत्री ने बताया कि मरीज एक दिन पहले रात में भर्ती हुई थी. उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया था, जिसमें बच्चे की धड़कन नहीं मिली. अगले दिन सुबह दोबारा अल्ट्रासाउंड किया गया, लेकिन उसमें भी भ्रूण की धड़कन नहीं थी और बच्चे की आईयूडी (Intrauterine Death) हो चुकी थी.

उन्होंने बताया कि डॉक्टर रश्मि वर्मा ने राउंड के बाद डॉक्टर पूजा को मरीज को लेबर पेन के लिए दवा देने के निर्देश दिए थे. करीब साढ़े 11 से पौने 12 बजे मरीज को दवा दी गई. इसके बाद मरीज स्वयं लेबर रूम की ओर कैसे गई, यह जांच का विषय है. उनके मुताबिक, करीब ढाई से पौने तीन बजे मरीज लेबर रूम की तरफ गई, जहां उसकी डिलीवरी हो गई.

फर्श पर मरीज के पड़े रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मरीज के रिश्तेदार पंकज मिश्रा ने उन्हें फोन किया था. सूचना मिलते ही डॉक्टर, स्टाफ नर्स, आया और सीएमएस मौके पर पहुंच गए थे, लेकिन परिजन मरीज को वहां से हटाने नहीं दे रहे थे. उन्होंने कहा कि मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी. ड्यूटी पर तैनात तीन स्टाफ नर्सों और डॉक्टर पूजा के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

(रिपोर्ट- राम बरन चौधरी)

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