Turkman Gate
Turkman Gate
आधी रात को बुलडोजर एक्शन के चलते दिल्ली के तुर्कमान गेट का इलाका एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार बुलडोजर एक्शन से इलाके में तनाव का माहौल है. इस एक्शन ने तुर्कमान गेट की पुरानी यादों को ताजा कर दिया. इमरजेंसी में एक बार ऐसा ही हुआ था, जब तुर्कमान गेट पर इंदिरा गांधी का बुलडोजर चला था. वो साल 1976 का था. चलिए आपको पूरी कहानी बताते हैं.
संजय गांधी के आदेश पर एक्शन-
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1975 में देश में आपातकाल लगा दिया था. इमरजेंसी का ये दौर साल 1977 तक चला. इस दौरान एक बार बुलडोजर एक्शन से दिल्ली सहम गई थी. इस दौरान कई ऐसी योजनाएं चलाई गई थी, जिसका बहुत बुरा असर आमजन पर पड़ा था. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक कैथरीन फ्रैंक ने इंदिरा गांधी की जीवनी में लिखती हैं कि उसी समय संजय ने इच्छा प्रकट की थी कि वो चाहते हैं कि उन्हें तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद साफ साफ दिखाई दे. डीडीए के उपाध्यक्ष जगमोहन मल्होत्रा ने संजय गांधी के इन शब्दों को आदेश की तरह लिया.
तुर्कमान गेट पर कार्रवाई-
इमरजेंसी के दौर में साल 1976 में 13 अप्रैल की सुबह पहली बार दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में सरकार ने बुलडोजर चलाया. इसके बाद 15 अप्रैल को बुलडोजर चले थे. सैकड़ों घरों को जमींदोज कर दिया गया था. हजारों लोग रोड पर आ गए थे. पूरी बस्ती मलबे में बदल गई थी.
महिलाओं और बच्चों ने किए प्रदर्शन-
19 अप्रैल 1976 को सुबह 500 महिलाएं औरक 200 बच्चे मकान गिराए जाने वाली जगह पर पहुंच गए. सभी लोग काली पट्टी बांधे हुए थे. कुछ देर बार बुलडोजर भी पहुंच गए. ट्रकों में सीआरपीएफ के जवान भी पहुंचे. इस दौरान लोगों ने सीआरपीएफ जवानों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया. इस दौरान मामला इतना बिगड़ गया कि पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हवा में फायरिंग की. पुलिस ने लाठीचार्ज किया. इसके बाद पुलिस ने फायरिंग की. सरकारी रिकॉर्ड्स के मुताबिक 14 राउंड गोली चलाई गई. सरकार आंकड़ों के मुताबिक फायरिंग में 6 लोग मारे गए थे. इसके बाद इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया. ये कर्फ्यू 13 मई 1976 तक चला.
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