महादेवा गांव की सफलता की कहानी
महादेवा गांव की सफलता की कहानी
कहते हैं इंसान की मेहनत और ईमानदारी से असंभव भी आसानी से संभव बन जाता है. ऐसा ही हुआ है बिहार में. दरअसल रोहतास जिले के जमुहार पंचायत अंतर्गत महादेवा गांव के किसानों ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. कभी पहाड़ी, पथरीली और जंगली जमीन के रूप में पड़ी यह भूमि आज हरियाली से आच्छादित है और किसानों की खुशहाली की कहानी बयां कर रही है.
इस तरह बनाया मिट्टी को उपजाऊ
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत मिले सहयोग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से महादेवा गांव के 100 से अधिक किसानों ने करीब 150 एकड़ बंजर भूमि को कृषि योग्य बना दिया. आज इस जमीन पर तरबूज, खरबूजा, सब्जी और स्ट्राबेरी जैसी नकदी फसलों की खेती कर किसान प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं.
प्रेरणा दायक है ये बदलाव
महादेवा गांव अब न सिर्फ रोहतास बल्कि पूरे बिहार और अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन चुका है. योजना के तहत किसानों को ड्रिप (टपक) और स्प्रिंकलर (फुहार) सिंचाई पद्धति से जोड़ा गया. आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझ रहे किसानों ने दशकों से बेकार पड़ी जमीन पर आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाकर तरबूज और खरबूजा की खेती शुरू की. देखते ही देखते यह पहल एक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसका असर आसपास के गांवों में भी दिखाई दे रहा है.
सरकार की ओर से बोरवेल और सबमर्सिबल पंप की सुविधा मिलने के बाद गांव के 15 किसानों ने क्लस्टर मॉडल के तहत स्ट्राबेरी की खेती की शुरुआत की. करीब 25 एकड़ भूमि में की जा रही इस खेती से किसानों को लाखों की आय हो रही है. इसके साथ ही धान, गेहूं और सब्जियों की खेती में भी जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा रहा है. लगभग 25 एकड़ भूमि में आधुनिक तरीके से की जा रही सब्जी उत्पादन प्रणाली अब दूसरे जिलों के किसानों के लिए भी उदाहरण बन चुकी है.
किसानों की कहानी उनकी जुबानी
किसानों का कहना है कि 'जल-जीवन-हरियाली' योजना के तहत ड्रिप इरिगेशन उनके लिए वरदान साबित हो रही है. करीब सात एकड़ भूमि में पिछले छह वर्षों से तरबूज और खरबूजे की खेती वह लोग कर पा रहे हैं. इस को करने से पारंपरिक खेती की तुलना में चार गुना अधिक मुनाफा हो रहा है. एक किसान, आलोक कुमार ने बताया कि वह इसी आमदनी से ही बेटे को कोटा में मेडिकल की तैयारी और बेटी को दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ा पा रहे हैं.
वहीं दूसरे किसान अनीश कुमार सिंह ने बताया कि'ड्रिप इरिगेशन की सुविधा मिलने के बाद दो एकड़ भूमि में स्ट्राबेरी की खेती शुरू की. पिछले तीन साल में इस अत्याधुनिक खेती से अच्छी आमदनी हुई है. इसी खेती की बदौलत कच्चे घर से पक्के घर का सपना पूरा हुआ. आज यह खेती दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है.'
महादेवा गांव की यह कहानी साबित करती है कि सही नीति, सरकारी सहयोग और किसानों की मेहनत मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है.
(रिपोर्ट- रोहित)
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