IMD predicts warm winter for north India
IMD predicts warm winter for north India
दिसम्बर का महीना शुरू हो गया है लेकिन ठंड का लेवल अभी कम ही है. मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में कम सर्दी देखी जा सकती है. लेकिन प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में अपेक्षाकृत ज्यादा सर्दी देखने को मिलेगी. मौसम विभाग ने गुरुवार को कहा कि इस सर्दी के मौसम (दिसंबर 2022 से फरवरी 2023) के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों और पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम (दिन) और न्यूनतम (रात) तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की उम्मीद है.
उत्तर भारत में नहीं पड़ेगी ज्यादा सर्दी
प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों, मध्य भारत के कुछ हिस्सों और उत्तर-पश्चिम भारत के अलग-अलग हिस्सों में सामान्य न्यूनतम तापमान से नीचे रहने की संभावना है. लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान के कुछ हिस्से) में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है.
दिलचस्प बात यह है कि IMD ने जिन वैश्विक मॉडल को कंसल्ट किया है, उनके हिसाब से ला नीना की स्थिति के बावजूद देश के उत्तरी भागों में औसत सर्दी की तुलना में कम सर्दी पड़ेगी. आपको बता दें कि अल नीनो और ला नीना, दोनों स्पेनिश शब्द हैं. जिनका मतलब है 'लड़का' और 'लड़की.' वहीं मौसम के लिहाज से देखा जाए तो ये परस्पर विपरीत घटनाएं हैं. जिसके दौरान भूमध्य रेखा के साथ प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म होना या ठंडा हो जाता है. साथ में, इन्हें अल नीनो-साउथर्न ओसिलेशन सिस्टम, या संक्षेप में ईएनएसओ के रूप में जाना जाता है.
ला नीना के कारण पड़ती है ज्यादा सर्दी
आपको बता दें कि ENSO का मौसम और जलवायु पैटर्न जैसे भारी बारिश, बाढ़ और सूखे पर बड़ा प्रभाव पड़ता है. उदाहरण के लिए भारत में, एल नीनो सूखे या कम मानसून से जुड़ा है जबकि ला नीना ज्यादा मानसून और औसत से अधिक बारिश और ठंडी सर्दियों से जुड़ा है.
हालांकि, भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक, डॉ मृत्यूंजय महापात्रा के मुताबिक, ला नीना सिर्फ एकमात्र कारण नहीं है बल्कि यह कुछ कारकों में से एक कारण है जो तापमान निर्धारित करता है. नवंबर में भी ला नीना प्रभाव था. ला नीना काल के दौरान अधिक चक्रवाती गड़बड़ी की उम्मीद होती है लेकिन इस बार केवल एक डिप्रेशन था क्योंकि इस बार मैडेन-जूलियन ओसिलेशन (MJO) सक्रिय था जिसने चक्रवाती गतिविधि को दबा दिया.
इन कारणों से कम होगी सर्दी
महापात्रा का कहना है कि सर्दी कम होने के दो कारण हो सकते हैं. अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधि कम हो सकती है जिससे कम बादल छाए रहेंगे और दिन और रात दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहेंगे. इस बार बंगाल की खाड़ी से पूर्वी हवाएं ज्यादा आ सकती हैं, जिससे तापमान बढ़ेगा, लेकिन इतनी नमी नहीं होगी जिससे बारिश हो जाए.
वहीं, इस बार दक्षिण भारत में पारा ज्यादा गिरने की संभावना है. क्योंकि इस साल दक्षिण भारत के कई शहरों में बारिश की संभावना है. जिससे वहां सामान्य से ज्यादा सर्दी पड़ सकती है. हालांकि, यह मौसम का केवल एक पूर्वानुमान है. हर दिन मौसम का हाल बदल सकता है लेकिन फिलहाल यही उम्मीद है कि उत्तर भारत में पारा सामान्य रहेगा.