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किसानों का 11 अगस्त को होने वाला रेल रोको आंदोलन फिलहाल स्थगित, सरकार ने मुआवजे से जुड़ी दो अहम मांगें मानीं

बाढ़ और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष द्वारा 11 अगस्त को दोपहर 12 बजे अमृतसर में प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है.

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Amritsar Rail Roko Protest Amritsar Rail Roko Protest

बाढ़ और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष द्वारा 11 अगस्त को दोपहर 12 बजे अमृतसर में प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. किसान संगठन और प्रशासन के बीच हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया. किसान नेताओं के अनुसार, सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा जारी करने और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा देने से संबंधित दो अहम मांगों पर सहमति जताई गई है.

भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष के प्रदेश अध्यक्ष पलविंदर सिंह माहल ने बताया कि किसानों की ओर से लंबे समय से बाढ़ प्रभावित परिवारों और ओलावृष्टि से नुकसान झेलने वाले किसानों को मुआवजा देने की मांग की जा रही थी. मांगों का समाधान न होने के कारण संगठन की ओर से 11 अगस्त को अमृतसर-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर मानांवाला में ट्रेनें रोकने का ऐलान किया गया था. इस आंदोलन में पंजाब के करीब 13 से 14 जिलों से किसानों के अमृतसर पहुंचने की तैयारी थी.

बाढ़ प्रभावित परिवारों को जल्द मुआवजा होगा जारी
रेल रोको आंदोलन के ऐलान के बाद प्रशासन की ओर से किसान नेताओं के साथ लगातार बातचीत की गई. इस संबंध में DIG, डिप्टी कमिश्नर, SSP और सिविल प्रशासन के अन्य अधिकारियों के साथ बैठकें हुईं. SSP ग्रामीण के आवास पर हुई बैठक के दौरान किसानों की प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई. पलविंदर सिंह माहल ने बताया कि किसानों की सबसे बड़ी मांग पिछले वर्ष बाढ़ से प्रभावित हुए परिवारों को जल्द मुआवजा जारी करवाना था. उन्होंने कहा कि कई परिवार लंबे समय से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं. बैठक के दौरान प्रशासन की ओर से भरोसा दिया गया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

इसके अलावा वर्ष 2024 में ओलावृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने संबंधी भी कार्रवाई शुरू करने का भरोसा दिया गया. संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रभावित किसानों से संपर्क करके उनके बैंक खातों सहित जरूरी जानकारी एकत्रित की जा रही है. सरकार की ओर से इन दोनों प्रमुख मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद किसान संगठन ने फिलहाल रेल रोको आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया.

रेल रोको आंदोलन को स्थगित करने पर सहमति
माहल ने कहा कि रेल रोकना किसानों की मजबूरी थी. उन्होंने कहा कि ट्रेनों में सफर करने वाले आम लोग भी उनके अपने हैं और किसान स्वयं भी नहीं चाहते कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़े. लेकिन लंबे समय से मांगें पूरी न होने के कारण किसानों को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ा.

उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से दोनों मांगों पर सकारात्मक भरोसा मिलने के बाद प्रदेश और जिला स्तर के किसान नेताओं के साथ ऑनलाइन बैठक की गई. बैठक में रेल रोको आंदोलन को स्थगित करने पर सहमति बनी. अब 11 अगस्त को मानांवाला में ट्रेनों का चक्का जाम नहीं किया जाएगा.

इस दौरान SSP ग्रामीण ने भी बताया कि भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष समिति की ओर से आज रेल रोको आंदोलन का ऐलान किया गया था. इसकी मुख्य मांगें बाढ़ और ओलावृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने से संबंधित थीं. उन्होंने कहा कि किसान नेताओं के साथ DIG, DC और सिविल प्रशासन के अधिकारियों की बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई.

15 अगस्त के बाद दोबारा बैठक
SSP ने कहा कि किसानों की मांगें संबंधित विभागों और मंत्रालयों को लिखित रूप में भेज दी गई हैं और 15 अगस्त के बाद दोबारा बैठक की जाएगी. उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में किसानों को मुआवजे का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, जबकि जिन लाभार्थियों को मुआवजा मिलना बाकी है, उनकी सूचियां तैयार हैं और उन्हें भी मुआवजा जारी किया जाएगा.

SSP ने स्पष्ट किया कि किसानों की ओर से रेल रोको आंदोलन स्थगित कर दिया गया है. इसलिए अमृतसर-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर मानांवाला में रेल यातायात रोकने का कोई कार्यक्रम नहीं होगा. उन्होंने लोगों से अपील की कि रेल यात्रा को लेकर किसी तरह का डर या चिंता न करें और अपनी यात्रा सामान्य रूप से कर सकते हैं.

उधर, किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि संघर्ष को केवल सरकार को मांगें पूरी करने के लिए समय देने के उद्देश्य से स्थगित किया गया है. पंजाब स्तर की बाकी मांगों को लेकर कृषि मंत्री के साथ चंडीगढ़ में बैठक होगी. इस बैठक के परिणाम और सरकार की ओर से की जाने वाली कार्रवाई के आधार पर किसान संगठन अपनी अगली रणनीति तय करेगा. यदि बाकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो किसान संगठन दोबारा संघर्ष का रास्ता अपना सकता है.

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