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Ramgarh Tuti Jharna Mandir: 24 घंटे 12 महीने मां गंगा करती हैं शिवलिंग का जलाभिषेक! जानें झारखंड के टूटी झरना मंदिर का अनोखा रहस्य

झारखंड के रामगढ़ स्थित प्राचीन टूटी झरना महादेव मंदिर में सावन की पहली सोमवारी पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मां गंगा की प्रतिमा की नाभि से निकल कर मां के होथों से होकर जलधारा सालभर 24 घंटे शिवलिंग का अभिषेक करती रहती है.

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Ramgarh tuti jharna mahadev mandir Ramgarh tuti jharna mahadev mandir

ईश्वर को कोई माने या न माने, लेकिन कई बार उनकी उपस्थिति और दैवीय शक्ति ऐसी अनुभूति कराती है कि श्रद्धा अपने आप सिर झुका देती है. झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित प्राचीन महादेव मंदिर, जिसे श्रद्धालु टूटी झरना मंदिर के नाम से जानते हैं, ऐसी ही आस्था का केंद्र है. सावन की पहली सोमवारी पर यहां हजारों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे. पूरे मंदिर परिसर में सुबह से ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे.

मां गंगा करती हैं 24 घंटे शिवलिंग का जलाभिषेक
टूटी झरना मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मंदिर के गर्भगृह में स्थापित मां गंगा की प्रतिमा की नाभि से निरंतर जलधारा निकलती है. यह जल प्रतिमा के दोनों हाथों से होकर सीधे नीचे स्थापित शिवलिंग पर गिरता है. खास बात यह है कि यह जलाभिषेक गर्मी, सर्दी और बरसात, यानी साल के बारहों महीने और चौबीसों घंटे लगातार होता रहता है. यही अनोखा दृश्य इस मंदिर को देशभर के श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान दिलाता है.

पहली सोमवारी पर रात दो बजे से पहुंचने लगे श्रद्धालु
मंदिर में सावन के दौरान विशेष रूप से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. पहली सोमवारी के अवसर पर भी दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचे. मंदिर के पुजारी शैलेश पांडे ने बताया कि रात दो बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था. उन्होंने कहा कि इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि मां गंगा की नाभि से निकलने वाला जल उनके दोनों हाथों से होकर 24 घंटे और पूरे साल शिवलिंग का अभिषेक करता रहता है.

श्रद्धालुओं ने बताया आस्था का अनुभव
मंदिर पहुंचीं श्रद्धालु माही सिंह ने बताया कि वह हर साल सावन के सोमवार पर यहां आती हैं. उनके अनुसार मंदिर में आकर बेहद शांति का अनुभव होता है, इसलिए हर सोमवार यहां दर्शन करने पहुंचती हैं. वहीं श्रद्धालु प्रज्ञा ने कहा कि यह बहुत प्राचीन मंदिर है और यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. इसी आस्था के कारण वह हर सावन में यहां दर्शन के लिए आती हैं.

भीड़ को संभालने में जुटा पुलिस प्रशासन
पहली सोमवारी को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा. कुजू थाना के एसआई अभिनव कुमार ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी ढाई से तीन बजे सुबह से ही ड्यूटी पर तैनात हैं. फिलहाल मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित तरीके से कराई जा रही है.

1925 में सामने आया था यह प्राचीन मंदिर
इस मंदिर का सटीक इतिहास ज्ञात नहीं है कि यह त्रेता, द्वापर या सतयुग का है अथवा इसका निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था. हालांकि, वर्ष 1925 में यह मंदिर उस समय प्रकाश में आया, जब अंग्रेज अधिकारी गोमो-बरकाकाना रेललाइन बिछाने का कार्य कर रहे थे. खुदाई के दौरान मिट्टी में दबा गुंबदनुमा ढांचा मिला, जिसे निकालने पर यह प्राचीन मंदिर सामने आया. तभी से यह चमत्कारिक मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
 

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