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रणथंभौर में लेपर्ड की मॉनिटरिंग के लिए लगाये जायेंगे साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर, जंगल से गांव की ओर बढ़ते ही ग्रामीणों को मिलेगा अलर्ट

रणथंभौर में लेपर्ड की निगरानी के लिए साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर लगाए जाएंगे. जंगल से आबादी की ओर बढ़ते ही अलार्म बजेगा और ग्रामीणों को अलर्ट किया जाएगा.

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Silent Devices and High Track Sensors Silent Devices and High Track Sensors

राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अब बाघों के साथ लेपर्ड की गतिविधियों पर भी हाईटेक तरीके से नजर रखी जाएगी. वन विभाग लेपर्ड और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है. इसके तहत जंगल से आबादी वाले इलाकों की ओर आने वाले वन्यजीवों की पहले ही पहचान कर ग्रामीणों को अलर्ट किया जाएगा.

रणथंभौर वन प्रशासन लेपर्ड की मॉनिटरिंग के लिए साइलेंट डिवाइस और हाई ट्रैक सेंसर लगाने की तैयारी कर रहा है. वन विभाग के मुताबिक राजस्थान के किसी टाइगर रिजर्व में इस तकनीक का यह पहला प्रयोग होगा. केरल में हाथियों की निगरानी और ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

डिवाइस कैसे करेगा काम?
यह डिवाइस जंगल से आबादी की तरफ आने वाले वन्यजीवों की गतिविधियों को ट्रैक करेगी. जैसे ही कोई लेपर्ड या दूसरा वन्यजीव चिन्हित रास्ते से आबादी की ओर बढ़ेगा, सिस्टम अलार्म के जरिए लोगों को अलर्ट करेगा. अलार्म की आवाज सैकड़ों मीटर दूर तक सुनाई देगी. इससे ग्रामीणों को सुरक्षित जगह जाने का समय मिलेगा. तेज आवाज से लेपर्ड के वापस जंगल की ओर जाने की भी उम्मीद है.

170 से ज्यादा लेपर्ड
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में करीब 170 से ज्यादा लेपर्ड मौजूद हैं. कई बार ये लेपर्ड जंगल की सीमा से बाहर निकलकर आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं. इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच खतरा बढ़ जाता है. इसी समस्या को कम करने के लिए वन विभाग यह तकनीक अपना रहा है.

इन इलाकों में लगाए जाएंगे सेंसर
रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि, लेपर्ड की ज्यादा आवाजाही वाले इलाकों को पहले चरण में चुना गया है. इनमें सवाई माधोपुर के पुराने शहर के आसपास के इलाके और फलोदी रेंज के दूमोदा, हिंदवाड़ और टोडरा शामिल हैं. जंगल से आबादी की ओर आने वाली मुख्य पगडंडियों और कच्चे रास्तों को भी चिन्हित किया गया है, जहां डिवाइस लगाए जाएंगे.

अगर ट्रायल सफल रहा तो भविष्य में रणथंभौर के सभी पैराफेरी और आबादी से सटे इलाकों में यह तकनीक लगाई जाएगी. इससे वन्यजीवों की बेहतर मॉनिटरिंग के साथ इंसानों और लेपर्ड के बीच होने वाले संघर्ष को रोकने में मदद मिलेगी.

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