रावण दहन के लिए तैयार रावण के पुतले
रावण दहन के लिए तैयार रावण के पुतले
नवरात्रि में सुबह मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और शाम को रामलीला के मंचन के साथ शहर में दशहरे की तैयारियां भी तेज हो गई हैं. रामलीला में जहां हर दिन रामायण के अलग-अलग प्रसंग दिखाए जाते हैं, वहीं आखिरी दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण दहन किया जाता है. अब यह आयोजन सिर्फ रामलीला मैदानों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के अलग-अलग ग्राउंड, कॉलोनियों और सोसायटियों में भी रावण, कुम्भकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है. ऐसे में जयपुर की रावण मंडी में दशहरे की रौनक देखते ही बन रही है.
एक फीट से 40 फीट तक के रावण
जयपुर की इस रावण मंडी में छोटे से लेकर विशालकाय रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं. यहां एक फीट से लेकर 40 फीट तक के रावण मिल रहे हैं. अब तक करीब 1500 से 2000 पुतले तैयार हो चुके हैं, जबकि कई पुतलों पर अभी भी काम जारी है. कुछ पुतले ऑर्डर के मुताबिक डिलीवरी के लिए रवाना हो चुके हैं, तो कारीगर बाकी ऑर्डर पूरे करने में जुटे हैं. रंग-बिरंगे कागजों और चमकदार सजावट से सजे ये पुतले लोगों का ध्यान खींच रहे हैं.
बारिश बनी चुनौती, लेकिन कारीगरों के हौसले बुलंद
मौसम में बदलाव और बारिश ने कारीगरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई जगह तैयार पुतलों को ढककर रखा गया है, तो कुछ पुतले बारिश में भीगने से प्रभावित हुए हैं. इसके बावजूद कारीगरों ने हिम्मत नहीं हारी है और दशहरे से पहले सभी ऑर्डर पूरे करने में लगे हैं. उनका कहना है कि रावण बनाने का काम करीब ढाई से तीन महीने पहले ही शुरू हो जाता है. इसके लिए बांस, अखबार, रंग-बिरंगे कागज, मैदे की लई और ग्लू जैसी सामग्री जुटाकर पुतले तैयार किए जाते हैं.
रावण के पुतलों से चलता है कई परिवारों का घर
कारीगरों के लिए दशहरे का यह सीजन रोजगार और आमदनी का बड़ा जरिया है. पुतले बनाने में कई दिनों की मेहनत और काफी समय लगता है. छोटे से छोटे एक फीट के रावण की कीमत करीब 300 रुपए से शुरू होती है, जबकि बड़े पुतलों की कीमत 30 से 35 हजार रुपए तक पहुंच जाती है. पुतलों को तैयार करके ग्राहकों को सौंप दिया जाता है और आतिशबाजी भरने का काम आयोजनकर्ता अपनी जरूरत के मुताबिक खुद करते हैं.
20 अक्टूबर को होगा रावण दहन
जयपुर की रावण मंडी के अलावा शहर के अलग-अलग इलाकों में भी विभिन्न आकार, रंग और डिजाइन के रावण तैयार किए जा रहे हैं. अब सभी की नजरें दशहरे पर टिकी हैं, जब 20 अक्टूबर को इन पुतलों का दहन किया जाएगा और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा.