शरदीय नवरात्र में देशभर में गरबा और डांडिया महोत्सव की धूम देखने को मिल रही है. धर्मनगरी चित्रकूट भी इससे अछूती नहीं है. यहां सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट परिसर के देवी पंडाल में आयोजित 9 दिवसीय भव्य गरबा महोत्सव में सैकड़ों श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना के साथ गरबा और डांडिया नृत्य कर रहे हैं. इस आयोजन में भक्ति और उत्साह के साथ भारतीय संस्कृति की खूबसूरत झलक भी देखने को मिल रही है. खास बात यह है कि महोत्सव के जरिए अनेकता में एकता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया जा रहा है.
चित्रकूट में गरबा और डांडिया की धूम
नवरात्र के अवसर पर धर्मनगरी चित्रकूट में भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. एक ओर मां दुर्गा के मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, तो वहीं दूसरी ओर देवी पंडालों में गरबा और डांडिया की धूम मची हुई है. सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट परिसर में आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं.
बुंदेलखंडी लोकनृत्य से गुजराती गरबा तक की प्रस्तुतियां
गरबा महोत्सव में बालक-बालिकाओं से लेकर महिला और पुरुषों की अलग-अलग टोलियां अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोह रही हैं. यहां बुंदेलखंडी लोकनृत्य, देशभक्ति गीतों और गुजराती गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिल रही हैं. मां दुर्गा की आराधना के साथ पारंपरिक नृत्य और संगीत का यह आयोजन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इस महोत्सव को देखने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. श्रद्धालु यहां गरबा और डांडिया का आनंद लेने के साथ नवरात्र के उत्सव में शामिल हो रहे हैं.
35 वर्षों से चली आ रही है गरबा महोत्सव की परंपरा
गरबा महोत्सव के आयोजक डॉ. इलेश जैन ने बताया कि सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट परिसर में पिछले 35 वर्षों से नवरात्र के नौ दिनों तक गरबा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस परंपरा की नींव उनके पिता पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन और माता ऊषा जैन ने रखी थी. तभी से यह आयोजन लगातार नवरात्र के दौरान किया जा रहा है.
भाईचारे और एकता का संदेश दे रहा महोत्सव
डॉ. इलेश जैन के मुताबिक, चित्रकूट का यह गरबा महोत्सव केवल मां दुर्गा की आराधना का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक भारत, श्रेष्ठ भारत और अनेकता में एकता की भावना को भी मजबूत करता है. इस आयोजन का उद्देश्य जाति, धर्म और ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर लोगों के बीच आपसी भाईचारे और प्रेम को बढ़ावा देना है. नवरात्र के दौरान आयोजित यह महोत्सव भारतीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से देखने का अवसर दे रहा है. गरबा और डांडिया के जरिए लोग मां दुर्गा की भक्ति में शामिल हो रहे हैं और एकता, प्रेम तथा सद्भाव का संदेश भी आगे बढ़ा रहे हैं.
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