सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज
सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के सिराथू में समाजवादी पार्टी का एक दिवसीय बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया. कार्यक्रम में सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे. उनके साथ उनके बेटे और सांसद पुष्पेंद्र सरोज भी मौजूद रहे. कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं का फूल-मालाओं से स्वागत किया. इसी दौरान इंद्रजीत सरोज ने मंच से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लेकर विवादित बयान दिया. इंद्रजीत सरोज ने मंच से कहा कि केशव प्रसाद मौर्य चाहे जितना बड़ा तिलक लगा लें, उन्हें कोई सम्मान नहीं मिलता. उनके मुताबिक, उन्हें कहीं स्टूल मिल जाता है. उन्होंने दावा किया कि जब से केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई है, तब से यूपी में कहीं भी चले जाएं, पंडित और ठाकुर उन्हें चुनाव हरा देंगे और जीतने नहीं देंगे. इंद्रजीत सरोज ने सामने बैठे एक व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए जातिगत टिप्पणी भी की. उन्होंने कहा कि सामने बैठे शुक्ला पैर की जूती को पैर में ही रखना चाहते हैं, सिर पर नहीं रखते हैं.
'हम तो भैया जातिवाद के बहुत पीड़ित व्यक्ति हैं'
इंद्रजीत सरोज ने कहा, 'हम तो भैया जातिवाद के बहुत पीड़ित व्यक्ति हैं.' उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को भी पता चल गया कि हम भी शूद्र हैं. उन्होंने इटावा के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जब से वहां गड़बड़ हुई और पवित्र गंगा जल से भी मतलब ज्यादा पवित्र जल का छिड़काव यादवों के ऊपर किया गया, तब से ये भी अपने आप को शूद्र मानने लगे. इंद्रजीत सरोज ने आगे कहा कि अभी मध्य प्रदेश में इनकी चुटिया उखाड़ दी गई, कथावाचक की. उन्होंने इसे यादव कथावाचक से जोड़ते हुए कहा कि एक मौर्य को मार-मारकर गिरा दिया गया और पैर छुआ रहे थे कथावाचक के. उन्होंने मंच से कहा, 'सही बता रहे हैं, यह है.'
'दलित, पिछड़े, आदिवासियों की कोई हैसियत नहीं'
अपने संबोधन में इंद्रजीत सरोज ने कहा कि भारत देश में दलित, पिछड़े और आदिवासियों की कोई हैसियत नहीं है. उन्होंने कहा कि 'हम लोग सेवा करने के लिए बनाए गए हैं.' इसके बाद उन्होंने मुसलमानों को लेकर कहा कि मुसलमान एक मोहरा और मुखौटा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बाकी तीर दनादन उनके और लोगों के ऊपर चल रहे हैं और भाजपा उनके हक और अधिकारों पर डाका डाल रही है. इंद्रजीत सरोज ने 69 हजार शिक्षकों की भर्ती का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने मंच से सवाल किया कि 69 हजार शिक्षकों की भर्ती का कभी समाधान हुआ क्या? उन्होंने कहा कि आज तक इसका समाधान नहीं हुआ. उनके इसी बयान के बाद यूपी में जातिवाद राजनीतिक हलचल एक बार दिखाई दे रही है. 2027 का चुनाव पास है और हर पार्टियों ने अपना-अपना मुद्दा और एडेंडा साफ कर दिया है. अब देखना दिलचस्प होगी की सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज के इस बयान पर भाजपा का क्या रूख होने वाला है.
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